संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो-टूक

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

संयुक्त राष्ट्र, 22 अक्टूबर 2026। भारत ने दो अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनलों) के काम को जारी रखने के लिए स्थापित तंत्र को बनाए रखने का समर्थन किया है। भारत का कहना है कि इससे इन दो क्षेत्रों में हुए युद्ध अपराधों और नरसंहार के लिए जवाबदेही सुनिश्चित बनी रहेगी। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बुधवार को कहा, ‘भारत इस तंत्र के बचे हुए कार्यों को जारी रखने के महत्व पर जोर देता है। इन कार्यों में पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय न्यायिक प्रणालियों की मदद करना और ट्रिब्यूनल के अभिलेखों (आर्काइव्स) को सुरक्षित रखना व उनका प्रबंधन करना शामिल है।’ उन्होंने कहा, ‘ये कार्य इन विशेष ट्रिब्यूनलों की विरासत को बचाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बहुत जरूरी हैं।’

भारत ने महासभा के सत्र पर क्या कहा?
सांसद मनीष तिवारी ‘इंटरनेशनल रेसिडुअल मैकेनिज्म फॉर क्रिमिनल ट्रिब्यूनल्स’ (आईआरएमसीटी) पर महासभा के एक सत्र में बोल रहे थे। इस तंत्र को 2010 में सुरक्षा परिषद द्वारा स्थापित किया गया था, ताकि रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के लिए बने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक ट्रिब्यूनलों के अधूरे काम को पूरा किया जा सके। रवांडा ट्रिब्यूनल ने गृहयुद्ध के दौरान तुत्सी समुदाय के नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाया और 1994 में अपना काम पूरा कर लिया। वहीं, युद्ध अपराधों के लिए न्याय करने वाला यूगोस्लाविया ट्रिब्यूनल 1993 में बंद हो गया था। यूगोस्लाविया ट्रिब्यूनल में 111 मुकदमे चले और 90 लोगों को दोषी ठहराया गया। इनमें से एक व्यक्ति की अपील अभी भी आईआरएमसीटी के पास लंबित है।

रवांडा ट्रिब्यूनल ने लगभग आठ लाख तुत्सी लोगों और कुछ उदारवादी हुतु लोगों के नरसंहार के मामले में 86 लोगों को आरोपी बनाया था। यह नरसंहार हुतु चरमपंथियों द्वारा किया गया था, जिनका उस समय रवांडा की सरकार पर नियंत्रण था। ट्रिब्यूनल से कुछ मामले अपने हाथ में लेने के बाद, आईआरएमसीटी ने 61 लोगों को दोषी ठहराया। तिवारी ने कहा, ‘हम अपराध करके बच निकलने (इम्प्युनिटी) के खिलाफ लड़ाई में इस तंत्र के योगदान को मानते हैं। हम इसके जनादेश को न्याय, निष्पक्षता, समानता और उचित कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुसार पूरा करने के महत्व को दोहराते हैं। न्याय के हितों को बनाए रखना और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना बहुत जरूरी है।’ 

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