किसानों के हित सर्वोपरि: पीयूष गोयल का लोकसभा में बड़ा बयान—भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र पर कोई आंच नहीं आएगी

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 05 फरवरी 2026। हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते ने भारतीय किसानों में वास्तविक चिंता पैदा की, जिसे अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रॉलिन्स के 2 फरवरी 2026 के ट्वीट ने और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि समझौता “अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार में अधिक निर्यात” करेगा, जिससे अमेरिकी किसानों के लिए कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी आएगी। किसान संगठनों, जैसे संयुक्त किसान मोर्चा, और विपक्षी नेताओं ने तुरंत आशंका जताई कि सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में बाढ़ ला सकते हैं, जिससे घरेलू किसानों और डेयरी उत्पादकों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। ये चिंताएं समझ में आती हैं। कृषि और डेयरी भारत की व्यापार वार्ताओं में लंबे समय से अटल लाल रेखा रही हैं। लेकिन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 4 फरवरी 2026 को लोकसभा में दिए बयान में इन आशंकाओं का स्पष्ट और दृढ़ता से खंडन किया।

सदन को संबोधित करते हुए मंत्री गोयल ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि भारत के संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित हैं। उन्होंने कहा: “भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्रों की रक्षा में सफलता हासिल की है।” उन्होंने जोर देकर दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “किसानों के हितों को कभी समझौता नहीं करने दिया” और “इन क्षेत्रों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं।” उन्होंने आगे पुष्टि की कि “खाद और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा गया है।”

ये केवल शब्द नहीं हैं। लगभग एक साल की गहन वार्ताओं के बाद यह समझौता अंतिम रूप ले रहा है, जिसमें भारत ने अपनी स्थिति को लगातार स्पष्ट रखा है: मुख्य कृषि उपज, डेयरी उत्पाद और अन्य संवेदनशील मदों को उन छूटों से बाहर रखा गया है जो घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। अमेरिकी पक्ष ने अपने किसानों के लाभों को उजागर किया है, लेकिन भारतीय वार्ताकारों ने सुनिश्चित किया कि कृषि उत्पादों पर शून्य टैरिफ की कोई व्यापक सहमति नहीं है। किसी भी टैरिफ में कमी गैर-संवेदनशील श्रेणियों तक सीमित है, जबकि कमजोर हिस्सों के लिए स्पष्ट सुरक्षा बरकरार है।

मंत्री गोयल ने बिल्कुल स्पष्ट किया कि भारत सरकार की पहली प्राथमिकता किसानों की भलाई और सुरक्षा है। यह समझौता आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें श्रम-गहन निर्यात क्षेत्रों—कपड़ा, परिधान, चमड़ा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पादों—को बढ़ावा मिलेगा, जबकि कृषि को कमजोर नहीं किया जाएगा। यह रोजगार पैदा करता है और एमएसएमई को मजबूत बनाता है बिना कृषि को नुकसान पहुंचाए।

किसानों को तथ्य चाहिए, डर नहीं। संसद में मंत्री का सीधा हस्तक्षेप प्रमाण है कि सरकार ने सुना और उनके हितों की रक्षा के लिए कार्रवाई की। जल्द जारी होने वाला भारत-अमेरिका संयुक्त बयान अंतिम विवरण देगा, लेकिन लोकसभा से संदेश पहले ही पूरी तरह स्पष्ट है: भारतीय किसानों के अधिकार सुरक्षित हैं, कृषि और डेयरी संरक्षित रहेगी, और सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। कोई चिंता की बात नहीं। सरकार ने जो हासिल किया है, वह एक संतुलित समझौता है जो देश के लिए नए अवसर खोलता है, जबकि किसान के हितों को सर्वोच्च रखता है।

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