बनाई थी रणनीति

इंडिया रिपोर्टर लाइव
वाशिंगटन, 24 अगस्त 2026। भारत के सेवानिवृत्तलेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने कहा कि ईरान पिछले चार दशक से अमेरिका के साथ संभावित युद्ध की तैयारी कर रहा था। उसने शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने जैसी स्थिति से निपटने की योजना भी बनाई थी। इससे विरोधियों के लिए पूरे ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म करना मुश्किल रहा।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यक्रम में पूर्व सैन्य खुफिया प्रमुख ढिल्लों ने कहा, ईरान ने अपनी सेना को 31 स्वतंत्र मुख्यालयों में बांटने वाली रणनीति अपनाई। इसके तहत केंद्रीय नेतृत्व खत्म होने पर भी अलग-अलग सैन्य इकाइयां काम करती रह सकती हैं।
ढिल्लों के मुताबिक, ईरान का पहाड़ी भूगोल भी उसके लिए बड़ा सुरक्षा कवच है। ऐसे इलाके में जमीनी हमला करना बेहद मुश्किल है। गर्मियों में ईरान के अंदर तापमान 55 से 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
होर्मुज की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
ढिल्लों ने कहा, ईरान के पास अमेरिका को समुद्र में सीधे चुनौती देने के लिए विमानवाहक पोत या मजबूत वायुसेना नहीं है। इसलिए उसने होर्मुज की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। इसके लिए स्पीड बोट, समुद्री बारूदी सुरंगें, टॉरपीडो नौकाएं, तटीय तोपें, मिसाइल और ड्रोन जैसी क्षमताएं विकसित की गई हैं।
ट्रंप ने होर्मुज को बताया अमेरिका का नया इलाका
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव रविवार को और बढ़ गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करते हुए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज को नया अमेरिकी क्षेत्र बताया। इस पर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा अमेरिका जब तक अपना रुख नहीं बदलता, तब तक यह समुद्री रास्ता बंद रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 अगस्त को भी ऐसी ही तस्वीर साझा की थी। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में पुलिस अकादमी के कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि वह जल्द होर्मुज को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।


