
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 12 मार्च 2026। भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के डॉक्टरों ने एक वयस्क मरीज में एन-ब्लॉक ड्यूल किडनी ट्रांसप्लांट (En-bloc Dual Kidney Transplant) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डोनर की कमी से जूझ रहे देश में यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।
क्या है यह एन-ब्लॉक तकनीक?
आमतौर पर जब एक डोनर अंगदान करता है तो उसकी दो किडनी दो अलग-अलग मरीजों को दी जाती हैं लेकिन कई बार मृत डोनर की किडनी का आकार छोटा होता है या वह एक किडनी अकेले पूरे शरीर का भार उठाने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली नहीं होती (खासकर यदि डोनर को डायबिटीज रही हो)। ऐसी स्थिति में डॉक्टर एक ही मरीज के शरीर में दोनों किडनी को एक साथ प्रत्यारोपित कर देते हैं। इसे ही ‘एन-ब्लॉक ड्यूल किडनी ट्रांसप्लांट’ कहते हैं। इससे किडनी की कार्यक्षमता (Efficiency) बढ़ जाती है और मरीज को लंबे समय तक डायलिसिस से मुक्ति मिल जाती है।
भारत में पहला ऐसा मामला
ILBS के रीनल ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अभियुत्थन सिंह जादौन के मुताबिक भारत में किसी वयस्क (Adult) मरीज में इस तरह का ट्रांसप्लांट यह पहला मामला है। इससे पहले यह तकनीक सिर्फ बच्चों के लिए इस्तेमाल की जाती थी। पूरी दुनिया में भी खासकर अमेरिका में ऐसे बेहद कम मामले दर्ज हैं।

