युद्धविराम के बीच फिर भड़का तनाव, हिजबुल्ला ने इस्राइली लड़ाकू विमानों पर दागीं मिसाइलें

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

तेल अवीव 06 जून 2026। पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। इस्राइली सेना ने दावा किया है कि हिजबुल्ला ने इस्राइली वायुसेना के विमानों को निशाना बनाकर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागीं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिन पहले ही इस्राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनी थी। हमले के बाद उत्तरी इस्राइल के कई इलाकों में सायरन बज उठे और हजारों लोग बंकरों की ओर भागे। हालांकि इस्राइली सेना ने कहा कि इस घटना में किसी विमान को नुकसान नहीं पहुंचा और न ही कोई घायल हुआ।

हिजबुल्ला ने हमला कैसे किया?
इस्राइली रक्षा बल यानी आईडीएफ के मुताबिक, हिजबुल्ला ने इस्राइली वायुसेना के विमानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। इसके बाद किरीयत शमोना शहर और लेबनान सीमा से लगे आठ गांवों में एयर रेड सायरन बजाए गए। हमले के कारण पूरे इलाके में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों और बंकरों में जाने के निर्देश दिए गए। हालांकि इस्राइल ने दावा किया कि उसकी वायुसेना के विमान सुरक्षित रहे और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका की मध्यस्थता में हाल ही में युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनी थी।

युद्धविराम के बावजूद क्यों बढ़ा तनाव?
बुधवार को वॉशिंगटन में हुई त्रिपक्षीय वार्ता के बाद इस्राइल और लेबनान ने संघर्ष विराम लागू करने पर सहमति जताई थी। लेकिन इसके बावजूद सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ। ईरान समर्थित हिजबुल्ला लगातार इस्राइल के खिलाफ आक्रामक रुख बनाए हुए है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी बयान दिया कि अमेरिका और इस्राइल के साथ संघर्ष विराम की शर्तों में लेबनान मोर्चे पर पूर्ण युद्धविराम शामिल है। इससे साफ है कि लेबनान का मुद्दा अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें ईरान और क्षेत्रीय राजनीति की बड़ी भूमिका है।

लेबनान के राष्ट्रपति ने ईरान-हिजबुल्ला पर क्या कहा?
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लेबनान को अमेरिका और ईरान के बीच सौदेबाजी का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए। आउन ने साफ कहा कि लेबनानी लोग युद्ध से थक चुके हैं और अब शांति चाहते हैं। उन्होंने हिजबुल्ला प्रमुख नईम कासिम के बयानों की भी आलोचना की। आउन ने कहा कि लेबनान के लोगों की इच्छा सबसे महत्वपूर्ण है, न कि किसी एक संगठन की। उन्होंने जोर देकर कहा कि लेबनान और इस्राइल के बीच संघर्ष का समाधान सिर्फ बातचीत से ही संभव है।

पश्चिम एशिया पहले से ही इस्राइल, ईरान और ईरान समर्थित संगठनों के बीच संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में हिजबुल्ला का ताजा हमला पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ा सकता है। लेबनान के भीतर भी अब युद्ध और शांति को लेकर अलग-अलग आवाजें सामने आ रही हैं। एक तरफ हिजबुल्ला संघर्ष जारी रखने की बात कर रहा है, वहीं लेबनान सरकार बातचीत और स्थिरता पर जोर दे रही है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या युद्धविराम बच पाएगा या फिर क्षेत्र एक बार फिर बड़े संघर्ष की तरफ बढ़ेगा।

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