
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 16 मार्च 2024। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तेलंगाना पहुंची, यहां हैदराबाद में शुक्रवार शाम को कान्हा शांति वनम में वैश्विक आध्यात्मिकता महोत्सव में शामिल हुईं और सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विश्व शांति के लिए विभिन्न धर्मों और उनके अनुयायियों के बीच आपसी समझ और सहयोग आवश्यक है। मुर्मू ने कहा, ‘हमारी द्वंद्वात्मक परंपराओं में, किसी एक दर्शन को सही या गलत साबित करने के बजाय, हम मानते हैं कि सभी रास्ते सत्य की ओर जाते हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘जो व्यक्ति सभी को समभाव से देखता है, वही योगी माना जाता है और यही समता का भाव हमारी आध्यात्मिक परंपरा का आधार है।’
राष्ट्रपति ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न धर्मों और संप्रदायों को मानने वाले लोगों के बीच सद्भाव और आपसी समझ बढ़ाना है, जो मानवता के कल्याण की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि चेतना स्वयं आध्यात्मिक है और इसमें किसी भी प्रकार के भेदभाव और विभाजन के लिए कोई जगह नहीं है।
मुर्मू ने बताया कि नैतिकता और आध्यात्मिकता पर आधारित जीवन व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर फायदेमंद है। उन्होंने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि देश में हमारे पूर्वजों की विरासत रही है कि हमें अपना कार्य नैतिक आदर्शों और आध्यात्मिक लक्ष्यों के अनुरूप करना चाहिए। साथ ही जो व्यक्ति इस विरासत के आधार पर आधुनिक विकास की ओर बढ़ेगा, वह सफल और खुशहाल होगा।
इसलिए महात्मा गांधी को साबरमती का संत कहा जाता है: मुर्मू
द्रौपदी मुर्मू ने आगे कहा कि भगवान महावीर, भगवान बुद्ध, जगद्गुरु शंकराचार्य, संत कबीर, संत रविदास और गुरु नानक से लेकर स्वामी विवेकानंद जैसी भारत की आध्यात्मिक विभूतियों ने दुनिया को आध्यात्मिकता का सार प्रदान किया है। उनहोंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने राजनीति में आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश किया, इसीलिए उन्हें साबरमती का संत कहा जाता है।