दुर्गा प्रतिमा और आरती की मांग, हिंदू संगठन ने दी चेतावनी

इंडिया रिपोर्टर लाइव
भोपाल, 13 सितंबर 2026। नवरात्रि शुरू होने से पहले गरबा आयोजनों को लेकर विवाद खड़ा होने लगा है। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाव मंच ने शहर में होने वाले गरबा आयोजनों को लेकर पंडाल संचालकों से धार्मिक और पारंपरिक स्वरूप बनाए रखने की अपील की है। समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि हर गरबा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाए, सुबह-शाम आरती हो और इसके बाद धार्मिक गीतों व भजनों पर गरबा कराया जाए। समिति ने गरबा पंडालों के प्रवेश को लेकर भी अलग व्यवस्था की मांग की है। तिवारी ने कहा कि प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन कराया जाए और इसके बाद लोगों को पंचगव्य देकर प्रवेश दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से आयोजन को धार्मिक स्वरूप देने में मदद मिलेगी।
नवरात्रि में नौ दिन मां की आराधना, गरबे के साथ पूजा का रंग
नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। घरों से लेकर मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों तक घट स्थापना, पूजा, आरती और भजन के आयोजन होते हैं। शाम के समय गरबा और डांडिया के आयोजन भी नवरात्रि उत्सव का प्रमुख हिस्सा बन चुके हैं। गरबा मूल रूप से देवी की आराधना से जुड़ी लोक परंपरा है। इसमें दीप या देवी के प्रतीक के चारों ओर समूह में नृत्य किया जाता है। समय के साथ शहरों में इसके बड़े सार्वजनिक आयोजन होने लगे हैं, जहां हजारों लोग शामिल होते हैं। इसी वजह से आयोजनों में सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं के पालन को लेकर भी अलग-अलग संगठन अपनी मांगें उठाते रहे हैं।
पंडाल में प्रतिमा, सुबह-शाम आरती की मांग
चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि गरबा केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां की आराधना से जुड़ा पर्व है। इसलिए पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा विधिवत स्थापित की जानी चाहिए। उन्होंने आयोजकों से कहा कि सुबह और शाम मां की आरती की जाए। आरती के बाद धार्मिक गीतों और भजनों पर गरबा कराया जाए। उनका कहना है कि आयोजन में नवरात्रि के धार्मिक स्वरूप को प्रमुखता मिलनी चाहिए।
प्रवेश द्वार पर वराह अवतार की प्रतिमा रखने की अपील
समिति ने पंडालों के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करने की भी अपील की है। तिवारी के अनुसार, वराह भगवान विष्णु का अवतार है, जिसमें उन्होंने पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाया था। उन्होंने कहा कि प्रवेश से पहले वराह प्रतिमा का पूजन कराया जाए। इसके बाद पंचगव्य ग्रहण कराने की व्यवस्था की जाए। पंचगव्य में गाय का दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र शामिल होते हैं।
अश्लीलता और फूहड़ता नहीं होनी चाहिए
गरबा आयोजनों में गीत-संगीत और नृत्य को लेकर भी समिति ने अपनी बात रखी है। तिवारी ने कहा कि नवरात्रि मां की आराधना का पर्व है, इसलिए गरबा पारंपरिक तरीके से होना चाहिए। आयोजन में किसी भी तरह की अश्लीलता या फूहड़ता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने गरबा आयोजकों से अपील की कि धार्मिक गीतों और भजनों को प्राथमिकता दी जाए और पूरे आयोजन का वातावरण नवरात्रि की परंपरा के अनुरूप रखा जाए।
नियम नहीं माने तो कार्रवाई की चेतावनी
हिंदू उत्सव समिति ने गरबा आयोजकों से इन व्यवस्थाओं को अपनाने की अपील करने के साथ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। तिवारी ने कहा कि पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाए और नवरात्रि के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखा जाए। ऐसा नहीं होने पर समिति अपनी ओर से कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी। नवरात्रि के दौरान शहर में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गरबा और डांडिया आयोजन होते हैं। ऐसे में आयोजन शुरू होने से पहले समिति की इस मांग ने गरबा पंडालों की व्यवस्थाओं और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।
क्या है पंचगव्य?
पंचगव्य को परंपरागत रूप से गाय से प्राप्त पांच पदार्थों का मिश्रण माना जाता है। इसमें दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र शामिल होते हैं। धार्मिक परंपराओं में इसका इस्तेमाल शुद्धीकरण और पूजा संबंधी अनुष्ठानों में किया जाता है।


