दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से नारे लगवाने की शिकायत

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भोपाल, 23 अक्टूबर 2026। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से कथित तौर पर राजनीतिक नारे लगवाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शिकायत की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने बच्चों को पैसे देकर यात्रा में शामिल कराने के आरोपों और बाल संरक्षण कानूनों के संभावित उल्लंघन की भी जांच करने को कहा है। आयोग के 22 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों का इस्तेमाल किया गया और उनसे राजनीतिक नारे लगवाए गए। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि घटना से संबंधित वीडियो और तस्वीरें 22 अक्टूबर को फेसबुक पर साझा की गई थीं। इसमें आशंका जताई गई कि बच्चों को पैसे देकर यात्रा में लाया गया हो सकता है। शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर आयोजन से जुड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।

मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले में संज्ञान लिया। आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को आरोपों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी जांचना होगा कि बच्चों को आर्थिक प्रलोभन देकर किसी गतिविधि में शामिल तो नहीं किया गया और क्या इस मामले में बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हुआ है। 

बच्चों के वीडियो और तस्वीरों की भी जांच
आयोग ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय  के सचिव को भी मामले में कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय को बच्चों के कथित वीडियो और तस्वीरों के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच करने को कहा गया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को जांच रिपोर्ट की प्रति ईमेल के माध्यम से भी भेजने के निर्देश दिए हैं। आयोग के सहायक रजिस्ट्रार (विधि) बृजवीर सिंह की ओर से जारी पत्र में संबंधित अधिकारियों से पत्र प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होनी है। आयोग के संज्ञान लेने का अर्थ आरोपों की पुष्टि होना नहीं है।

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