भारत-बांग्लादेश सीमा पर फैला संगठित घुसपैठ नेटवर्क का जाल, रेट कार्ड तय; संवेदनशील सेक्टरों की पहचान

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 14 दिसंबर 2025। भारत-बांग्लादेश सीमा दक्षिण एशिया की उन सीमाओं में से है जहां अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और दस्तावेज जालसाजी का सबसे संगठित नेटवर्क सक्रिय है। गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्टों, सीमा सुरक्षा बल के फ्रंटियर कमांड की ब्रीफिंग और संसद में प्रस्तुत अधिकृत बयानों से यह खुलासा हुआ है। कुल 4096.7 किलोमीटर लंबी सीमा में से 3032.7 किलोमीटर पर फेंसिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन शेष क्षेत्र विशेषकर नदी और दलदली भूभाग अब भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

घुसपैठ की जोखिम और उसके उद्देश्य को देखते हुए इनका रेट कार्ड फिक्स है। इसकी पुष्टि स्थानीय सुरक्षा तंत्र और स्थानीय मीडिया ने भी की है। मार्ग और जोखिम के आधार पर 8000 रुपये से 70-80,000 रुपए  तक वसूले जाते हैं।

पहाड़ी रास्तों से घुसपैठ का रेट कम, आईडी देने पर बढ़ती है कीमत
क्षेत्रीय खुफिया दस्तावेजों, सीमा सुरक्षा बल के सेक्टर-कमांडरों की  की रिपोर्टों के अनुसार अवैध प्रवेश करवाने वाले नेटवर्क ने मार्ग के आधार पर अपना शुल्क तय कर रखा है। पहाड़ी रास्तों से भारत लाए जाने वाले व्यक्तियों को मीडियम रिस्क श्रेणी में रखा जाता है और उनसे 8000 से 10000 रुपए तक वसूले जाते हैं। जंगल अथवा नदी मार्ग से प्रवेश जोखिमपूर्ण माना जाता है, जिसके लिए 12,000 से 14,000 रुपए लिए जाते हैं। फर्जी भारतीय पहचान- पत्र उपलब्ध कराने के लिए भारतीय बिचौलिए 40 से 50,000 रुपए तक की मांग करते हैं। सुरक्षित शहरों में नौकरी दिलाने का वादा करने वाले नेटवर्क 70 से 80,000 रुपए तक वसूलते हैं। यह पूरा तंत्र भारतीय और बांग्लादेशी एजेंटों की संयुक्त सहभागिता से संचालित होता है। सीमा सुरक्षा बल ने इस गतिविधि को संगठित मानव तस्करी की श्रेणी में रखा है।

क्यों नहीं पकड़ में आते घुसपैठिए?
गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन प्रभाग और सीमा सुरक्षा बल की वार्षिक ब्रीफिंगों में यह बताया गया है कि लगभग 1000 किलोमीटर से अधिक सीमा नदी आधारित है, जहां फेंसिंग नहीं है।सीमांत क्षेत्रों में सहानुभूति आधारित स्थानीय सहायता और सीमा पार व्यापार पर आर्थिक निर्भरता के कारण अवैध प्रवेश को स्थानीय संरक्षण मिलता है।

मुर्शिदाबाद का डेमोग्राफिक बदलाव
आंकड़ों के अनुसार मुर्शिदाबाद में 1961 में हिन्दू आबादी 44.01 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 55.9 प्रतिशत थी। वर्ष 2025 के लिए उपलब्ध सूचनाओं में हिन्दू आबादी घटकर 33.2 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी बढ़कर 66.3 प्रतिशत बताई गई है। सीमा सुरक्षा बल की दक्षिण बंगाल फ्रंटियर हर वर्ष सबसे अधिक अवैध प्रवेश पकड़ने वाली इकाई के रूप में दर्ज होती है। पद्मा, जलंगी, भागीरथी और इछामती नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर फेंसिंग की कमी है, जिससे अत्यधिक जोखिम वाला माना जाता है।

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