
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 22 जून 2026। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (CAR-T) थेरेपी देश में कैंसर विशेषकर रक्त कैंसर के गंभीर चरण पर पहुंच चुके मरीजों के लिये उम्मीद की किरण बन चुकी है। थेरेपी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले IIT मुबंई में प्रोफेसर और शोधकर्ता डा. राहुल पुरवार ने बताया कि CAR-T थेरेपी एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी है, जिसमें मरीज के अपने T-cells यानी Immune cells को प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से संशोधित कर कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। इसके बाद इन्हें वापस मरीज के शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है। वर्तमान में यह तकनीक मुख्य रूप से रक्त कैंसर (B-cell acute lymphoblastic leukemia) के उन मरीजों पर इस्तेमाल की जाती है जिनकी बीमारी उपचार के बाद फिर लौट आई हो अथवा जिन पर पारंपरिक उपचार (Chemotherapy or radiotherapy) प्रभावी न रहा हो। इसके अलावा बी-सेल नान होजकिन लिमफोमा (B-NHL) के मरीजों के उपचार में भी यह तकनीक कारगर साबित हुई है। उत्तर प्रदेश में इस थेरैपी का इस्तेमाल संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के अलावा मेंदाता सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल में किया जा रहा है।
40 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकता इलाज
जालौन में विकासखंड रामपुरा के मूल निवासी डॉ. राहुल पुरवार ने अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों से न केवल जालौन बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। नकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के चलते उन्हें देश के चुनिंदा 120 नवाचारियों में शामिल किया गया है, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फ्रांस दौरे पर जाने का अवसर मिला है। यह दौरा भारत और फ्रांस के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। डॉ. पुरवार के नेतृत्व में विकसित स्वदेशी CAR-T थेरेपी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्र को समर्पित कर चुकी हैं। इस तकनीक की विशेषता यह है कि विदेशों में जिस उपचार की लागत 4 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंचती है, वही उपचार भारत में विकसित तकनीक के माध्यम से लगभग 26 से 40 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकता है। इससे हजारों कैंसर मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। डॉ. राहुल पुरवार के अनुसार, बायोटेक्नोलॉजी विभाग और बाइरैक के सहयोग से वर्ष 2021 में इस तकनीक का विकास शुरू हुआ। इसके बाद टाटा मेमोरियल अस्पताल और IIT मुंबई में सफल क्लीनिकल परीक्षण किए गए। 60 मरीजों पर हुए परीक्षणों में Extremely positive परिणाम प्राप्त हुए, जिनमें छह बच्चे भी शामिल थे।
रामपुरा में जन्मे और पले-बढ़े डॉ. राहुल पुरवार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा समर सिंह इंटर कॉलेज, रामपुरा से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जर्मनी से PHDऔर अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज, बोस्टन से फेलोशिप हासिल की। विदेशों में बेहतर अवसर उपलब्ध होने के बावजूद उन्होंने भारत लौटकर वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देने का संकल्प लिया और उसे सफलतापूर्वक साकार किया।


