
इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली 26 जून 2026। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बड़ी मांग रखी है। भारत ने कहा कि जो लोग स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाते हैं, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। भारत ने जोर देकर कहा कि बिना सजा के बच्चों की सुरक्षा का काम अधूरा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पार्वथनेनी ने सुरक्षा परिषद में यह बात कही। उन्होंने ‘सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की शिक्षा की सुरक्षा’ विषय पर अपनी बात रखी।राजदूत ने कहा कि शिक्षा एक ऐसा अधिकार है जो युद्ध के समय भी मिलना चाहिए। यह शांति स्थापित करने का सबसे ताकतवर जरिया है। भारत युद्ध के दौरान बच्चों की सुरक्षा और उनके पढ़ने-लिखने के अधिकार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत चाहता है कि हर बच्चा अपनी पूरी क्षमता को पहचान सके। संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 2025 की रिपोर्ट बहुत चिंताजनक है। इस रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध वाले इलाकों में बच्चों के खिलाफ हिंसा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। साल 2025 में बच्चों के खिलाफ 38,558 गंभीर अपराध दर्ज हुए। इनसे 24,174 बच्चे प्रभावित हुए। इनमें 15,493 लड़के और 7,990 लड़कियां शामिल हैं। करीब 691 बच्चों की पहचान नहीं हो सकी। यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। कई बच्चों के साथ तो एक से ज्यादा बार गंभीर अपराध हुए।
रिपोर्ट में बताया गया कि युद्ध में शामिल गुटों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं किया। वे बिना किसी डर के अपराध करते रहे। इसका बुरा असर आम लोगों और बच्चों पर पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सेनाएं भी बच्चों की हत्या और स्कूलों पर हमलों के लिए जिम्मेदार पाई गईं। उन्होंने मानवीय मदद को भी रोकने का काम किया।
भारत ने कहा कि बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर सेक्रेटरी-जनरल की 2025 की सालाना रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसमें बताया गया है कि एक ही साल में स्कूलों पर हमलों में 44 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। दुनिया में हर छह में से एक बच्चा यानी करीब 47.3 करोड़ बच्चे युद्ध वाले इलाकों में रहते हैं। इनमें से 8.5 करोड़ से ज्यादा बच्चों के पास शिक्षा की कोई सुविधा नहीं है। भारत ने इसे पूरी मानवता की विफलता बताया है।


