दिल्ली तक महक रहा जीराफूल, सरगुजा राजपरिवार के सदस्य ने तैयार किया इंटीग्रेटेड खेती का शानदार मॉडल

इंडिया रिपोर्टर लाइव
सरगुजा, 10 अगस्त 2026। अमूमन राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले युवाओं का रुझान बड़े व्यवसाय या राजनीति की ओर होता है, लेकिन सरगुजा राजपरिवार के सदस्य विंधेश्वर शरण सिंहदेव ने एक अलग ही राह चुनी है। बीकॉम की उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद विंधेश्वर ने अपने पिता स्व. यूएस सिंहदेव की कृषि विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया। आज वे अंबिकापुर के पास सरगवां में 40 एकड़ जमीन पर जैविक खेती का एक ऐसा विकसित मॉडल तैयार कर चुके हैं, जो पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गया है। वे न केवल खुद सफल खेती कर रहे हैं, बल्कि सरगुजा के अन्य किसानों को भी ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रहे हैं, ताकि आम लोगों तक सेहतमंद आहार पहुंच सके।
विंधेश्वर अपने खेतों में पूरी तरह से 100 प्रतिशत जैविक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके खेत में सुगंधित धान के अलावा सभी प्रकार की हरी सब्जियां, अंजीर और कई तरह के फलों का बंपर उत्पादन हो रहा है। रासायनिक खादों से पूरी तरह दूरी बनाने का सुखद परिणाम यह हुआ है कि फसलों का उत्पादन तो बढ़ा ही है, साथ ही खेतों की उर्वरा शक्ति में भी शानदार सुधार देखने को मिला है। सरगवां के इस फार्म में विशुद्ध ऑर्गेनिक तरीके से तैयार हो रहे स्थानीय सुगंधित चावल की खुशबू अब केवल सरगुजा तक सीमित नहीं है। इसकी शुद्धता और स्वाद के कारण इसकी मांग दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों तक पहुंच गई है। गुणवत्ता के कारण लोग इनके कृषि उत्पादों को हाथों-हाथ ले रहे हैं।
विंधेश्वर ने केवल खेती तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने परिसर में एक बड़ी डेयरी भी स्थापित की है। वर्तमान में अंबिकापुर शहर में सबसे अधिक दूध का उत्पादन इसी फार्म से हो रहा है। सबसे खास बात यह है कि डेयरी से निकलने वाले गोबर का शत-प्रतिशत सदुपयोग किया जाता है। गोबर से गोबर गैस बनाई जाती है और फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक खाद तैयार की जाती है। इसी खाद का उपयोग 40 एकड़ के खेतों में होता है, जिससे खेती की लागत भी कम हो रही है। राज परिवार के इस युवा ने अपनी उन्नत खेती और डेयरी के माध्यम से स्थानीय स्तर पर 60 से 70 लोगों को नियमित रोजगार भी उपलब्ध कराया है। विंधेश्वर का यह प्रयास साबित करता है कि अगर युवा लगन के साथ खेती को आधुनिक, वैज्ञानिक और जैविक तरीके से अपनाएं, तो यह न केवल एक फायदे का सौदा है, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा योगदान है।


