जीवन को पटरी पर लाने के लिए सरकार की एक और पहल, सुरक्षा के बीच प्रमुख जिलों में शुरू की जाएगी बस सेवा

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

इंफाल 04 दिसंबर 2024। मणिपुर पिछले साल मई से जातीय संघर्ष से जूझ रहा है। हालांकि, पहले से हिंसा में कमी आई है।केंद्र और राज्य सरकार स्थिति को सामान्य करने के लिए हरसंभव काम कर रही है। ऐसे में अब राज्य सरकार ने इंफाल से पहाड़ी जिलों तक कड़ी सुरक्षा के बीच फिर से अंतर जिला सार्वजनिक वाहनों का संचालन करने का फैसला किया है। बता दें, राज्य में 19 महीनों में सार्वजनिक परिवहन सेवा को फिर से शुरू करने की प्रशासन की यह दूसरी कोशिश होगी। यहां घाटी के प्रमुख मैतेई समुदाय और चुराचांदपुर तथा कुछ अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में प्रमुख कुकी जनजातियों के बीच झड़पें होती रही हैं।

जानकारी जुटाने के बाद लिया फैसला

मुख्य सचिव विनीत जोशी ने कहा, ‘राज्य सरकार ने सुरक्षा बलों की उपलब्धता और विभिन्न एजेंसियों से मिली जानकारी के साथ राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। इसके साथ ही पर्याप्त संख्या में सुरक्षा तैनाती के साथ सार्वजनिक वाहनों का का आवागमन फिर से शुरू करने का फैसला किया।’ 

इस मार्ग पर चलेंगे वाहन

सार्वजनिक वाहन इंफाल से कांगपोकपी होते हुए सेनापति तक और बुधवार से इंफाल से बिष्णुपुर होते हुए चुराचांदपुर तक चलाए जाएंगे। गौरतलब है, सेनापति नगा बहुल इलाका है, जबकि कांगपोकपी और चुराचांदपुर कुकी बहुल इलाके हैं। इंफाल और बिष्णुपुर मैतेई बहुल इलाके हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि आवाजाही केवल निर्धारित घंटों तक ही सीमित रहेगी। साथ ही मार्ग में शामिल होने के इच्छुक लोगों को सूचित किया जाता है कि वे उपायुक्तों के संबंधित कार्यालयों से संपर्क करें। राज्य सरकार द्वारा की गई इस पहल का उद्देश्य राज्य में आम जनता के सामने आने वाली शिकायतों को दूर करना है।

अगर आवागमन को किया प्रभावित तो होगी कार्रवाई

राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस पहल के लिए प्रशासन का सहयोग करें और हिंसा का सहारा नहीं लें। अधिकारी ने कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति छूट के बिना वाहनों की आवाजाही को बाधित करता है, तो उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा और कानूनों के अनुसार मुकदमा चलाया जाएगा।

अबतक सैकड़ों की मौत

पिछले साल मई में मैतेई और कुकी के बीच जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से मणिपुर में बार-बार हिंसा होती रही है। तब से अब तक कम से कम 258 लोग मारे जा चुके हैं और हजारों बेघर हो गए हैं। इंफाल घाटी और पहाड़ी जिलों के बीच सार्वजनिक बस सेवाएं भी उस समय रुक गई थीं।

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