रिश्तों में नया मोड़: नौ साल बाद चीन जाएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति, व्यापार और ताइवान पर होगी बड़ी बातचीत

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

बीजिंग 11 मई 2026। करीब नौ साल बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर हो रही है। ऐसे समय में यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, जब अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ी हुई है। साथ ही ताइवान, व्यापार और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव भी लगातार बना हुआ है।

ट्रंप चीन दौरे पर क्या-क्या करेंगे?

व्हाइट हाउस की प्रिंसिपल डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी अन्ना केली के मुताबिक, ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे। गुरुवार को उनका भव्य स्वागत समारोह आयोजित होगा, जिसके बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। कार्यक्रम में टेंपल ऑफ हेवन का दौरा और राजकीय भोज भी शामिल है। शुक्रवार को दोनों नेता एक बार फिर मुलाकात करेंगे, जहां चाय पर चर्चा और वर्किंग लंच का आयोजन होगा। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि इस साल के अंत में शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा भी हो सकती है।

ट्रंप की यात्रा क्यों है अहम?

ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ और व्यापार समझौते को लेकर उम्मीदें तेज हैं। दोनों देशों ने रविवार को घोषणा की कि चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग 12 और 13 मई को दक्षिण कोरिया में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के साथ अंतिम दौर की व्यापार वार्ता करेंगे। माना जा रहा है कि इन बातचीतों का मकसद ट्रंप की यात्रा से पहले व्यापारिक तनाव को कम करना है।

कहां होगा बातचीत का फोकस?

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह वार्ता दक्षिण कोरिया के बुसान में दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति और हालिया फोन बातचीत के आधार पर आगे बढ़ेगी। बातचीत में आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर फोकस रहेगा।

ताइवान का मुद्दा होगा अहम

इस बीच, ताइवान का मुद्दा भी ट्रंप-शी वार्ता के केंद्र में रहने वाला है। ट्रंप की यात्रा से पहले वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ताइवान को लेकर लगातार चर्चा होती रही है, लेकिन अमेरिका की आधिकारिक नीति पहले जैसी ही बनी हुई है।

हथियार बिक्री का मुद्दा

अमेरिकी अधिकारियों ने ताइवान को हथियार बिक्री का मुद्दा भी उठाया। उनका दावा है कि ट्रंप प्रशासन ने अपने पहले कार्यकाल के शुरुआती वर्ष में ही ताइवान को पिछले प्रशासन के पूरे चार वर्षों की तुलना में कहीं अधिक हथियार बिक्री को मंजूरी दी थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका, चीन के दबाव के बावजूद ताइवान के समर्थन के अपने रुख में नरमी नहीं दिखाना चाहता।

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