अमेरिकी संसद में ट्रंप के खिलाफ बगावत; ईरान जंग रोकने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी, कहा- “यह लापरवाह व महंगा युद्ध अब समाप्त करो”

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

वांशिगटन 04 जून 2026। अमेरिका में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने युद्ध शक्तियों (War Powers Resolution) से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ आगे की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को सीमित करना है। इस मतदान में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।बुधवार को हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। परिणाम घोषित होते ही युद्ध विरोधी सांसदों ने इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही और कांग्रेस के संवैधानिक अधिकारों की जीत बताया।

करदाताओं पर 100 अरब डॉलर से अधिक का बोझ
ईरान के खिलाफ लगभग तीन महीने से जारी संघर्ष ने अमेरिका की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है। बढ़ती सैन्य लागत, वैश्विक अस्थिरता और तेल की कीमतों में उछाल के कारण युद्ध के प्रति जनता और सांसदों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष Mike Johnson ने दो सप्ताह पहले सदन की कार्यवाही अचानक स्थगित कर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की थी। हालांकि जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता गया, प्रस्ताव के समर्थन में सांसदों की संख्या बढ़ती गई। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक नेता Hakeem Jeffries ने कहा कि यह युद्ध महंगा और बिना स्पष्ट रणनीति वाला संघर्ष बन चुका है। उन्होंने कहा, “यह लापरवाह और महंगा युद्ध अब समाप्त होना चाहिए। इस संघर्ष ने अमेरिकी करदाताओं पर 100 अरब डॉलर से अधिक का बोझ डाल दिया है और दुनिया में अमेरिका की स्थिति को कमजोर किया है।

राष्ट्रपति के खिलाफ समर्थन दिया
ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को सीमित करने के लिए प्रतिनिधि सभा में यह चौथा प्रयास था। इससे पहले लाए गए सभी प्रस्ताव विफल रहे थे, लेकिन इस बार पर्याप्त समर्थन मिलने से प्रस्ताव पारित हो गया। पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में भी इसी तरह का प्रस्ताव पेश किया गया था, जहां कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर समर्थन दिया था। राष्ट्रपति Donald Trump ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखने और घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया था। लेकिन ईरान संघर्ष ने एक बार फिर पश्चिम एशिया को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। युद्ध के कारण तेल कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे अमेरिका में महंगाई का दबाव भी बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी मध्यावधि चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जताई चिंता
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष कहा कि यदि कांग्रेस इस तरह के प्रस्तावों को पारित करती है तो ईरान यह समझ सकता है कि अमेरिकी प्रशासन के हाथ बंध गए हैं। रुबियो ने कहा कि ऐसी स्थिति में तेहरान को लग सकता है कि अमेरिका उसके खिलाफ निर्णायक कदम नहीं उठा सकता, जिससे किसी संभावित समझौते की संभावना कमजोर हो सकती है।

होरमुज जलडमरूमध्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था
युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हुआ है। अमेरिकी प्रशासन अपने सहयोगी देशों से होरमुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए खुला रखने में सहयोग की अपील कर रहा है। यह जलमार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

अब सीनेट में होगी अग्निपरीक्षा
प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बावजूद यह प्रस्ताव तुरंत युद्ध नहीं रोकेगा। इसे अब अमेरिकी सीनेट में मंजूरी मिलनी बाकी है।विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव कानूनी प्रभाव से अधिक राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व रखता है। फिर भी यह दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर ईरान युद्ध को लेकर असहमति लगातार बढ़ रही है।

संवैधानिक बहस फिर तेज
अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है, जबकि राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। इसी कारण युद्ध और शांति से जुड़े फैसलों में अंतिम अधिकार को लेकर दशकों से बहस चलती रही है। युद्ध शक्तियां अधिनियम के तहत किसी सैन्य कार्रवाई के 60 दिनों के भीतर राष्ट्रपति को कांग्रेस से मंजूरी प्राप्त करनी होती है। हालांकि व्हाइट हाउस का तर्क है कि युद्धविराम की घोषणा के बाद सक्रिय शत्रुता समाप्त मानी जानी चाहिए।

क्या होगा आगे?
प्रतिनिधि सभा का यह फैसला अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यदि सीनेट भी इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो ट्रंप प्रशासन पर ईरान नीति को लेकर दबाव और बढ़ सकता है। साथ ही यह बहस भी तेज होगी कि विदेश नीति और सैन्य कार्रवाई पर अंतिम निर्णय का अधिकार राष्ट्रपति के पास होना चाहिए या कांग्रेस के पास।

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