250 वर्ष पुराना है मस्जिद के नीचे मिला कुआं!

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

सहारनपुर, 08 सितंबर 2026।  सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद उसके नीचे मिले कुएं की जांच के लिए सोमवार को एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की टीम लखनऊ से सहारनपुर पहुंची। एएसआई के सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि कुआं करीब 250 साल पुराना हो सकता है। अभी जांच जारी है। उधर, सपा और कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया। 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ सदस्यों ने सर्किट हाउस पहुंचकर प्रेसवार्ता की और एडीएम प्रशासन संतोष बहादुर को ज्ञापन सौंपा।

दो दिन पहले सपा के 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के मंडलायुक्त से मिलने की घोषणा के बाद पुलिस-प्रशासन अलर्ट रहा। ज्यादातर सपाइयों को पुलिस ने उनके गृह जनपद में ही हाउस अरेस्ट कर लिया।मुजफ्फरनगर से सांसद हरेंद्र मलिक और जिलाध्यक्ष जिया चौधरी कार्यकर्ताओं के साथ दोपहर के समय मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे। मंडलायुक्त के नहीं मिलने पर अपर आयुक्त को ज्ञापन दिया गया। इस दौरान सर्किट हाउस में विधान परिषद अन्य नेता पहले से पहुंचे हुए थे। वहां पर भी पुलिस की में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव, सांसद इकरा हसन समेत घेराबंदी रही। पूर्व मंत्री शायान मसूद को सर्किट हाउस पहुंचते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस दौरान प्रेसवार्ता करते हुए सपाइयों ने इसे सरकार और प्रशासन की तानाशाही बताया। उन्होंने मस्जिद स्थल पर सफाई, खोदाई या किसी भी तरह के परिवर्तन पर रोक लगाने, भूखंड पर तीसरे पक्ष के अधिकार अथवा निर्माण को रोकने की मांग की। वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अजय राय को सहारनपुर पहुंचने से पहले ही लखनऊ में हाउस अरेस्ट कर लिया गया।

उधर, लखनऊ से आई टीम ने कुएं की ईंटों की बनावट समेत पुरातात्विक पहलुओं को परखा गया। प्राथमिक जांच के बाद अधिकारी ने बताया कि कुआं लखौरी ईंटों से बना हुआ प्रतीत हो रहा है। प्रारंभिक तौर पर उम्र करीब 250 साल पुरानी हो सकती है। वहीं, विश्वकर्मा चौक पर एक विवादित पोस्टर लगा मिला, जिसकी जांच शुरू कर दी गई है। वहीं कलक्ट्रेट परिसकी मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया है। सोमवार को गेट पर मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद कलक्ट्रेट में प्रवेश दिया गया। इसके साथ ही आईडी चेक की गई।

सहारनपुर : 250 वर्ष पुराना हो सकता है कुआं
कलक्ट्रेट परिसर में मिले कुएं की जांच के लिए सोमवार को लखनऊ से एएसआई के सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव पहुंचे। उन्होंने कुएं में उतरकर उसकी आंतरिक संरचना को देखा और परखा। बताया कि कुआं 200 से 250 साल पुराना हो सकता है। प्रथम दृष्टया कुएं की संरचना उत्तर मध्यकालीन लग रही है। आगे की जांच प्रशासन के ऊपर निर्भर है। यदि खोदाई आदि का निर्णय लिया जाता है तो की जाएगी। एएसआई की जांच को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में तमाम तरह की चर्चाएं रहीं। दोपहर 12:30 बजे के आसपास डॉग स्क्वॉड ने स्थल की जांच की। दोपहर करीब 1:30 बजे पुरातत्व विभाग से आए विशेषज्ञ ने कलक्ट्रेट परिसर में रविवार को मिले का कुएं का बाहरी परीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आसपास की मिट्टी और वाह्य संरचना को बारीकी से देखा।दोपहर 1:45 बजे सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने कुएं में उतरने से पहले फीते से उसकी गहराई का अंदाजा लगाया। इसके बाद सीढ़ी लगाकर वह कुएं में उतरे। करीब 15 मिनट तक कुएं के अंदर स्थित संरचना, ईंट आदि की जांच-पड़ताल करने के बाद वह बाहर आए। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया को डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि सहारनपुर का इतिहास मानवीय संस्कृति के साथ जुड़ा हुआ है। यहां पर विभिन्न कालखंडों में कई निर्माण हुए हैं। कुएं के विषय में बताया कि प्रथम दृष्टया यह कुएं जैसी आकृति है। धरातल से कुएं की गहराई 20 फीट है। इसका व्यास तीन फीट है। कुएं में लगी लखौरी ईंट का अनुपात 20-10-5 है। मतलब ईंट 20 सेंटीमीटर लंबी, दस सेंटीमीटर चौड़ी और पांच सेंटीमीटर ऊंची हैं।

मलबा हटाने के दौरान 1909 की ईंट मिलने का दावा 
कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मलबे को हटाने के दौरान एक ईंट मिलने का दावा किया जा रहा है। दावा है कि ईंट पर 1909 अंकित है। हालांकि यह साफ नहीं है कि यह ईंट के निर्माण की तिथि है या कुछ और। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सोशल मीडिया पर चल रही हैं।

कलक्ट्रेट में बढ़ी सुरक्षा, जांच के बाद दिया गया प्रवेश
सहारनपुर स्थित कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया है। सोमवार को गेट पर मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद कलक्ट्रेट में प्रवेश दिया गया। इसके साथ ही आईडी चेक की गई। पुलिसकर्मियों ने कलक्ट्रेट में आने का उद्देश्य भी पूछा। शनिवार सुबह कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई थी।  इसके बाद से कलक्ट्रेट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सोमवार को कलक्ट्रेट खुलने के साथ ही फरियादियों की भीड़ उमड़ी। लोग काम कराने के लिए कलक्ट्रेट पहुंचे। किसी ने रजिस्ट्री कार्यालय में प्लॉट, मकान संबंधित कागजी कार्रवाई पूरी कराई तो किसी ने अधिवक्ताओं के चैंबर्स से शपथ पत्र तैयार कराए। इसके साथ ही सदर तहसील में भी फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे। इससे पहले कर्मचारियों और फरियादियों को कलक्ट्रेट गेट पर मेटल डिटेक्टर की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने कलक्ट्रेट आने वाले कर्मचारी-फरियादी को डिटेक्टर से जांच करने के बाद ही प्रवेश दिया। इसके साथ ही कलक्ट्रेट में आने वाले लोगों से उद्देश्य के बारे में भी जानकारी हासिल की। साथ ही कर्मचारियों व अधिवक्ताओं की आईडी चेक की गई। प्रवेश भी केवल मुख्य गेट से ही दिया, जबकि कोषागार, रजिस्ट्री, खनन और अधिवक्ताओं के चैंबर्स वाले गेटों को बंद रखा गया। उधर, एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि सुरक्षा के लिए लिहाज से कलक्ट्रेट समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है।

मस्जिद प्रबंधन कमेटी एक से दो दिनों में दाखिल करेगी रिट
कलक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण को लेकर आगे की रणनीति को लेकर में प्रबंधन पक्ष हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का पैनल तैयार किया जा रहा है। आगामी एक-दो दिन में रिट दाखिल कर दी जाएगी। मस्जिद प्रबंधन कमेटी के अधिवक्ता बाबर वसीम ने बताया कि कलक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपनी बात को मजबूती से रखा जाएगी। साथ ही अतिरिक्त साक्ष्यों को भी अदालत के समक्ष रखने की तैयारी है। जल्दी ही रिट दाखिल की जाएगी। इसके लिए कमेटी प्रबंधन प्रयागराज हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का पैनल तैयार कर रहा है। इसके साथ ही तमाम कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। 

1909 की ईंट मिलने से खुलेंगे कई राज
कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मलबे को हटाए जाने के दौरान ईंट मिलने का दावा किया जा रहा है। इससे और भी राज खुल सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि यह ईंट वर्ष 1909 की निर्मित है। शनिवार सुबह 7:30 बजे क्लक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा शुरू की गई थी। उसके बाद देर शाम तक मलबे को हटाए जाने का कार्य जारी रहा। इस दौरान ईंट पर 1909 अंकित है। दावा किया जा रहा है की मस्जिद में लगी यह ईंट वर्ष 1909 की है। कई लोगों का यह भी कहना है कि इससे मस्जिद के 119 वर्ष से भी अधिक पुरानी निर्मित होने का पता चलता है। हालांकि यह दावे से नहीं कहा जा सकता कि यह ईंट 1909 में ही निर्मित है या फिर यह किसी तरह के अन्य जानकारी को प्रदर्शित करता है। सोमवार को एएसआई के विशेषज्ञ ने भी स्थल पर मिले कुएं का निरीक्षण किया है।

ग्राम समाज के लेखपालों के बयान हुए दर्ज, 14 सितंबर सुनवाई की नई तिथि
सरकारी भूमि पर संचालित अवैध मदरसों, मस्जिदों और मजारों के संबंध में धारा 67 के तहत जारी नोटिसों के मामले में सोमवार को ग्राम समाज के लेखपालों के बयान दर्ज किए गए। इस दौरान संबंधित धार्मिक स्थलों के सभी मुतवल्ली और प्रबंधक तहसीलदार के समक्ष पेश हुए। मामले में अगली सुनवाई के लिए 14 सितंबर की नई तिथि दी गई है। सहारनपुर कलक्ट्रेट मस्जिद की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच सोमवार को देवबंद तहसीलदार की कोर्ट में धार्मिक स्थलों के मामले में निर्धारित तिथि पर भूमि स्वामित्व को लेकर ग्राम समाज के लेखपालों के बयान दर्ज किए गए।

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