मध्य प्रदेश में बदला मौसम का मिजाज

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

भोपाल, 11 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। प्रदेश के ऊपरी हिस्से में सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण के असर से ग्वालियर-चंबल अंचल में अगले दो दिन बारिश होने की संभावना है। दूसरी ओर, दिन में तेज धूप के बीच रातें ठंडी होने लगी हैं। इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार और सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और श्योपुर में आंधी के साथ बारिश हो सकती है। शनिवार को भी सिंगरौली, रीवा, मऊगंज और सीधी में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहे। हालांकि, 13 और 14 अक्टूबर को प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से 15 अक्टूबर के बाद एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

दिन में गर्मी, रात में बढ़ने लगी ठंडक
प्रदेश में मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। दिन में कई शहरों में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर बना हुआ है, जबकि रात में पारा गिरने से ठंडक बढ़ रही है। इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री, अमरकंटक में 16.6, भोपाल और पचमढ़ी में 16.8, शाजापुर में 17 और कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, बड़वानी, ग्वालियर, राजगढ़, खजुराहो, धार और उज्जैन में दिन का तापमान 36 डिग्री या उससे अधिक रहा। अगले कुछ दिनों तक दिन में धूप और रात में ठंडक का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

अक्टूबर में बदलता रहेगा मौसम का मिजाज
प्रदेश से तीन अक्टूबर को मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन अलग-अलग मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी महीने की शुरुआत में दिन साफ और धूप वाले रहे, जबकि रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है।

सामान्य से चार प्रतिशत कम हुई बारिश
इस साल जून से सितंबर तक मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश हुई। प्रदेश की सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह सीजन में सामान्य से करीब चार प्रतिशत कम पानी गिरा।

बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर भी रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 प्रतिशत की कमी रही। प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा।पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, धार, झाबुआ, इंदौर, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, उज्जैन और शाजापुर सहित कई जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। कुछ जिलों में यह कमी 20 प्रतिशत से भी अधिक रही।

जून की कम बारिश से बिगड़ा पूरे सीजन का हिसाब
मौसम विभाग के मुताबिक, जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति में सुधार आया, लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से बारिश की रफ्तार थम गई। सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश के आंकड़ों में सुधार हुआ, लेकिन शुरुआती कमी का असर पूरे सीजन के कुल आंकड़े पर बना रहा। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश में करीब 100 दिन सक्रिय रहा और अंततः सामान्य से चार प्रतिशत कम बारिश के साथ विदा हुआ। 

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