दांतों और वजन पर पड़ने वाले असर को समझें

इंडिया रिपोर्टर लाइव
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026। बच्चों को खुश करने या उनकी प्यास बुझाने के लिए कई माता-पिता पैकेट वाला जूस, सॉफ्ट ड्रिंक, फ्लेवर्ड मिल्क और दूसरे मीठे पेय दे देते हैं। बच्चों को इनका स्वाद पसंद आता है, लेकिन क्या रोजाना ऐसे पेय पीना उनकी सेहत के लिए सही है?
हम सभी को ये समझने की जरूरत है कि इनमें मौजूद अतिरिक्त चीनी बच्चों के दांतों की सेहत और वजन को प्रभावित कर सकती है। कई बार माता-पिता पैकेट पर लिखे फ्रूट जूस या हेल्दी ड्रिंक जैसे शब्दों को देखकर इन्हें पौष्टिक विकल्प मान लेते हैं, जबकि इनमें चीनी की मात्रा अलग-अलग हो सकती है।
आइए इस लेख में जानते हैं कि मीठे पेय बच्चों की सेहत को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, किन विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए और इनकी आदत कैसे कम करें।
बच्चों को ज्यादा मीठे पेय देने के क्या नुकसान हो सकते हैं?
1. दांतों में कैविटी का खतरा
मीठे पेय में मौजूद चीनी पर मुंह के बैक्टीरिया अम्ल बनाते हैं, जो दांतों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बार-बार मीठे पेय पीने से दांतों में सड़न और कैविटी का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों को दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मीठे पेय पिलाने के बजाय पानी को प्राथमिकता देना बेहतर है।
2. वजन बढ़ने की आशंका
सॉफ्ट ड्रिंक्स और चीनी वाले पेय अतिरिक्त कैलोरी देते हैं। इन्हें नियमित रूप से पीने से कुल कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है, खासकर जब बच्चा पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न करता हो। लंबे समय में इससे अस्वस्थ वजन बढ़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
3. पैकेट वाला जूस हमेशा हेल्दी नहीं होता
फ्रूट जूस, फ्रूट ड्रिंक और फ्लेवर्ड पेय एक जैसे नहीं होते। कुछ उत्पादों में अतिरिक्त चीनी होती है, जबकि 100% फलों के जूस में भी प्राकृतिक शर्करा होती है और साबुत फल की तुलना में फाइबर कम होता है। इसलिए पैकेट पर सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना जरूरी है।
4. मीठे पेय की आदत विकसित होना
अगर बच्चों को बार-बार मीठे पेय दिए जाएं, तो वे पानी जैसे कम मीठे विकल्पों की तुलना में मीठे स्वाद को ज्यादा पसंद करने लग सकते हैं। इसलिए बचपन से पानी और बिना अतिरिक्त चीनी वाले उपयुक्त पेय की आदत विकसित करना उपयोगी है।
बच्चों को मीठे पेय की जगह क्या दें?
- बिना चीनी वाले विकल्प: बच्चों की उम्र और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार चुनें।
- सादा दूध: उम्र के अनुसार उपयुक्त मात्रा में, बिना अतिरिक्त चीनी या फ्लेवर के।
- साबुत फल: जूस की जगह फल देने से फाइबर भी मिलता है।


