‘भाईचारा लोकतंत्र की जड़’, चंद्रचूड़ बोले- यह केवल शब्द नहीं, स्वतंत्रता के लिए आंदोलन का प्रतीक

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नई दिल्ली 07 दिसंबर 2024। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बंधुत्व (भाईचार) लोकतंत्र की जड़ है। संविधान में यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि दुनिया भर में स्वतंत्रता के लिए एक आंदोलन का प्रतीक है। कोच्चि में संविधान दिवस के अवसर पर केरल उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ द्वारा आयोजित ‘संविधान के तहत बंधुत्व-एक समावेशी समाज के लिए हमारी खोज’ विषय पर पूर्व सीजेआई ने व्याख्यान दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बंधुत्व का मतलब- हर नागरिक की गरिमा की रक्षा करना है। यह हमारे संविधान के सबसे महत्वपूर्ण मूल्यों में से एक है। 

संविधान निर्माता ने बंधुत्व को प्रेम-करुणा का प्रतीक बताया

पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारे संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने हमें याद दिलाया कि भाईचारा लोकतंत्र की जड़ है। उन्होंने बंधुत्व को प्रेम और करुणा का प्रतीक बताया, जिसे हम अक्सर जीवन में पूरी तरह से लागू नहीं कर पाते। 

2011 में छत्तीसगढ़ के माओवादी विद्रोह का उदाहरण दिया

इसके साथ ही, उन्होंने 2011 में छत्तीसगढ़ में माओवादी विद्रोह के खिलाफ एक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उदाहरण दिया, जिसमें असंवैधानिक रूप से हथियारों से लैस युवाओं को तैनात करना भाईचारा के खिलाफ माना गया था। उन्होंने रेखांकित किया कि भाईचारा वह मूल्य है जो परिभाषित करता है कि हम एक साथ मौजूद रहेंगे या अपनी ही रचना को नष्ट कर देंगे।

मानव अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों के प्रति आगाह किया

मानव अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा, ‘हम वैश्विक मानवता का निर्माण करने के लिए एक साथ बंधे हैं।’ उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन, पर्यावरणीय संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये हमारी और पूरी दुनिया की भलाई के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आगाह किया कि हमारे तटीय समुदाय, कृषि समुदाय, भोजन, पानी, हवा और अस्तित्व के स्रोत खतरे में हैं।

भारत के जनसंख्या लाभ का भी पूर्व सीजेआई ने जिक्र किया

पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने भारत के जनसंख्या लाभ का भी जिक्र किया और कहा कि भारत का कामकाजी वर्ग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में भारत का योगदान वैश्विक कार्यबल में बड़ा होगा। उन्होंने कहा कि 2030 तक, हम कार्यबल में 800 मिलियन लोगों को जोड़ देंगे। यानी अगले दशक तक हमें वैश्विक कार्यबल में 24.3 प्रतिशत योगदान देने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आज भी कार्यबल में केवल 24 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जो एक चिंता का विषय है। बैठक की अध्यक्षता केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नितिन जामदार ने की।

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