एक गैंगस्टर पढ़ा रही तो दूसरी संवार रही जिंदगी

इंडिया रिपोर्टर लाइव
गोरखपुर, 07 नवंबर 2026। जेल की ऊंची दीवारें, लोहे की सलाखें और बंद दरवाजे… आमतौर पर इनकी तस्वीर जेहन में आते ही सजा और सन्नाटे का ख्याल आता है, लेकिन जिला जेल की महिला बैरक में जिंदगी का एक अलग ही रंग दिखाई देता है। यहां कोई पढ़ना-लिखना सीख रहा है तो कोई हुनर के सहारे बाहर की दुनिया में नई शुरुआत का सपना बुन रहा है। खास बात यह है कि कभी अपने-अपने मामलों को लेकर सुर्खियों में रहीं कुछ महिला बंदियां अब दूसरी महिलाओं के लिए सीखने और आगे बढ़ने का जरिया बन रही हैं।
करोड़ों की जालसाजी के मामले में बंद पीएचडी होल्डर गरिमा सिंह महिला बंदियों और उनके बच्चों को पढ़ा रही हैं। सीओ समेत पुलिसकर्मियों से वसूली के मामले में जेल में बंद अंशिका सिंह ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दे रही हैं। वहीं, शिक्षिक की आत्महत्या के मामले में बंद निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव महिला बंदियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दे रही हैं।
जेल प्रशासन ने महिला बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार से जोड़ने के लिए संस्थाओं के सहयोग से प्रशिक्षण शुरू कराया है। रोटरी क्लब यूथोरिया की ओर से प्रेमलता सिंह के माध्यम से ब्यूटीशियन का कोर्स कराया जा रहा है। जेल सूत्रों के मुताबिक, अंकिशा खुद भी अच्छी ब्यूटीशियन हैं। ऐसे में वह अपने अनुभव से दूसरी बंदियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। वहीं, एसीएम सहयोगी संस्था की ओर से सिलाई-कढ़ाई सिखाई जा रही है। प्रशिक्षण लेने वाली कुछ महिलाएं अब बैरक में दूसरी बंदियों के कपड़े सिलने में सहयोग कर रही हैं। कई महिलाएं खाना बनाने में भी हाथ बंटाती हैं।
त्योहारों पर बैरक बन जाता है परिवार
महिला बैरक में बंदियों के बीच आपसी तालमेल भी खास है। तीज, होली, दिवाली और करवाचौथ जैसे त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते हैं। महिला बंदी रक्षक भी इस आयोजन का हिस्सा बनती हैं। धीरे-धीरे उनके बीच ऐसा अपनापन बन गया है कि त्योहारों पर बैरक का माहौल परिवार जैसा नजर आता है।
73 महिला बंदियों के साथ छह बच्चे भी
जिला जेल में इस समय 73 महिला बंदी हैं। इनके साथ छह बच्चे भी रह रहे हैं। इनमें से दो बच्चे सेंट एंथोनी स्कूल में पढ़ने जाते हैं। जेल में पढ़ाई और प्रशिक्षण की गतिविधियां बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के लिए भी सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश हैं।
महिला बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से ब्यूटीशियन और सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। पढ़ाई, प्रशिक्षण और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से उन्हें सकारात्मक माहौल देने का प्रयास है। – डीके पांडेय, जेल अधीक्षक गोरखपुर
शहर के इन चर्चित मामलों में सजा काट रही महिलाएं
केस 1
गोरखनाथ इलाके के बसंत इनक्लेव अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह की आत्महत्या के मामले में गरिमा सिंह का नाम सामने आया था। पुलिस ने गरिमा सिंह और उनके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस के अनुसार, गरिमा के खिलाफ अलग-अलग थानों में 10 एफआईआर दर्ज हैं। इस मामले में पुलिस ने पहली चार्जशीट दाखिल की है। पीएचडी कर चुकीं गरिमा अब जेल में महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों को पढ़ाने में सहयोग कर रही हैं।
केस 2
अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा पर पांच वर्षों में सीओ, दारोगा समेत 165 लोगों को ब्लैकमेल करने का आरोप है। पुलिस जांच के मुताबिक, वह मैसेंजर के जरिये लोगों से संपर्क करती और वीडियो कॉल के दौरान वीडियो रिकॉर्ड कर लेती थी। इसके बाद दुष्कर्म जैसे मामलों में फंसाने की धमकी देकर रुपये वसूलने का आरोप है। पुलिस की जांच में अयोध्या में तैनात एक सीओ समेत 15 पुलिसकर्मियों के उसके जाल में फंसने की बात सामने आई थी। एक गोलीकांड के बाद बरामद मोबाइल की जांच में भी पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली थीं। अब जेल में वह अपने ब्यूटीशियन के हुनर से दूसरी महिला बंदियों को प्रशिक्षण दे रही है।
केस 3
देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव पर शिक्षक कृष्ण भगवान सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है। कुशीनगर निवासी शिक्षक देवरिया के गौरी बाजार विकासखंड स्थित लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में सहायक अध्यापक थे। 20 फरवरी 2026 को उन्होंने गोरखपुर के शाहपुर क्षेत्र स्थित शिवपुर शाहबाजगंज में अपने भाई के मकान में आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट और वीडियो में उन्होंने शालिनी श्रीवास्तव और बीएसए कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। मामले में 25 हजार रुपये की इनामी शालिनी को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। जेल में उन्हें किताबें पढ़ने का शौक है। इसी रुचि के साथ वह दूसरी महिला बंदियों को महिलाओं के लिए संचालित सरकारी योजनाओं की जानकारी भी देती हैं।


