
इंडिया रिपोर्टर लाइव
रायपुर 08 नवंबर 2025। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने मेडिकल, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों में कुल 1009 नए पदों की स्वीकृति दी है। इन पदों पर भर्ती से राज्य के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, लेकिन अब प्रदेश के विभिन्न जिलों में मेडिकल, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी संस्थानों का व्यापक नेटवर्क तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि ये नए पद न केवल युवाओं के लिए रोजगार का अवसर बनेंगे, बल्कि प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने इस निर्णय को स्वास्थ्य क्षेत्र में नई ऊर्जा और विशेषज्ञता लाने वाला कदम बताया, जिससे प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और सेवा दोनों के स्तर में सुधार होगा।
कहां-कहां मिलेगी नई नियुक्तियां
- मेडिकल कॉलेज रायगढ़ – 39 पद
- डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रायपुर – 1 पद
- मेडिकल कॉलेज बिलासपुर – 20 पद
- फिजियोथेरेपी कॉलेज जगदलपुर, जशपुर, मनेंद्रगढ़ – 108 पद (प्रत्येक में 36)
- नए फिजियोथेरेपी कॉलेज (मनेंद्रगढ़, जशपुर, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर) – 216 पद
- नए मेडिकल कॉलेज (दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, कुनकुरी-जशपुर) – 180 पद (प्रत्येक में 60)
- नए मेडिकल कॉलेज (जांजगीर-चांपा, कबीरधाम) – 120 पद (प्रत्येक में 60)
- सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बिलासपुर – 55 पद
- मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर (रेडियोथेरपी विभाग) – 7 पद
- नर्सिंग कॉलेज (दंतेवाड़ा, बैकुंठपुर, बीजापुर, बलरामपुर, जशपुर) – 210 पद
- नए नर्सिंग कॉलेज (नवा रायपुर, पुसौर-रायगढ़, जांजगीर-चांपा, कुरूद-धमतरी) – 168 पद
स्वास्थ्य मंत्री ने जताया आभार
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा, “नए पदों की स्वीकृति से हमारे मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों का ढांचा मजबूत होगा, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित नर्सों की उपलब्धता बढ़ेगी।”
प्रदेश के हर जिले में सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य सेवाएं
सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक जिले में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हों। इस फैसले से न केवल अस्पतालों में स्टाफ की कमी दूर होगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा का दायरा भी प्रदेश के सुदूर इलाकों तक बढ़ेगा।


