
इंडिया रिपोर्टर लाइव
बिलासपुर, 26 जुलाई 2026। एआईटीयूसी (AITUC) सीजेपी (CJP) टीम, उनके साथ खड़े सभी छात्र एवं युवा संगठनों तथा देशभर के छात्रों और युवाओं को शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और नीट (NEET) पेपर लीक मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को हासिल करने की इस महत्वपूर्ण जीत पर हार्दिक बधाई देता है। अब समय आ गया है कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गिरावट, प्रतिगामी नई शिक्षा नीति (NEP), विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए, विशेषकर तब जब देश में बेरोजगारी अभूतपूर्व स्तर पर है।
इस आंदोलन ने एक बार फिर स्थापित किया है कि सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही लोकतंत्र का मूल आधार है। जेन-ज़ी (Gen Z) के इस संघर्ष ने यह भी सिद्ध किया कि संविधान द्वारा स्थापित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति व्यक्त करने का अधिकार तथा शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं। इस आंदोलन को “राष्ट्रविरोधी”, “अराजक” या “विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित” बताने के सरकार के प्रयास अंततः उसी पर उलटे पड़े। सरकार ने इस आंदोलन को दबाने के लिए निंदनीय तरीके अपनाए। प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बर पुलिस बल का प्रयोग किया गया, जिसमें पैलेट गन और शॉक बैटन का इस्तेमाल भी शामिल था। आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ अंधाधुंध आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के माध्यम से नोटिस जारी कर उन्हें डराने और धमकाने का प्रयास किया गया। लेकिन इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि लोकतंत्र में सच बोलने वालों के लिए भय का कोई स्थान नहीं है।
एआईटीयूसी आंदोलनरत छात्रों और युवाओं की उन मांगों का समर्थन करता है, जिनमें नीट पेपर लीक के कारण अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को उचित मुआवजा देने तथा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मुकदमों को वापस लेने की मांग शामिल है।
धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, भारत की रीढ़ है। इस आंदोलन से उठी आवाज़ ने एक बार फिर करोड़ों भारतीयों में उम्मीद का संचार किया है।


