हिंद महासागर में मजबूत होगी पकड़: चीन को जवाब देने की तैयारी, सेशेल्स के साथ सामरिक रिश्ते मजबूत करेगा भारत

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 28 जून 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा सिर्फ एक द्विपक्षीय दौरा भर नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं का अहम हिस्सा है। करीब 11 वर्ष बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की सेशेल्स यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हिंद महासागर वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। भारत भी हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच ऐसे साझेदार देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, जिनकी समुद्री स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। सुरक्षित, शांतिपूर्ण तथा समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र की पैरोकारी करने वाला भारत सैन्य अड्डे स्थापित करने के बजाय साझेदार देशों की क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर जोर देता रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा हिंद महासागर में भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच और साझेदार देशों के साथ भरोसेमंद संबंध आगे बढ़ाने की एक अहम पहल है। अफ्रीका, पश्चिम एशिया और एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के कारण सेशेल्स की सामरिक अहमियत लगातार बढ़ी है। सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पीएम की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत इस क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और भरोसेमंद साझेदारी मजबूत करना चाहता है। प्रधानमंत्री ने सेशेल्स रवाना होने पहले अपने बयान में कहा भी कि उनकी यात्रा भारत-सेशेल्स के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और गहरा करेगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और सुरक्षित, शांतिपूर्ण तथा समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। सेशेल्स भले ही छोटा द्वीपीय देश है, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर की समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण बनाती है। भारत के महासागर विजन में सेशेल्स प्रमुख साझेदारों में शामिल है।

भारत-सेशेल्स की दोस्ती स्थिर और मजबूत- मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और सेशेल्स के बीच की दोस्ती को स्थिर, मजबूत और दीर्घकालिक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दोस्ती लगातार आगे बढ़ रही और विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर तरक्की की रेस को जीतेंगे। प्रधानमंत्री ने यह बात सेशेल्स के राष्ट्रपति पेट्रिक हर्मिनी की ओर से उनके सम्मान में आयोजित राजकीय रात्रिभोज के दौरान कही।

भारत यूएन सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का हकदार- सेशेल्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा के बीच वहां की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है। सेशेल्स का यह कदम वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और हिंद महासागर में उसकी केंद्रीय भूमिका को स्वीकार्यता देता है। सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉर ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका, विशाल जनसंख्या तथा अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा में उसका महत्वपूर्ण योगदान देखते हुए उसे सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए। फॉर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में समयानुकूल सुधार की आवश्यकता है। वर्तमान में भारत और अफ्रीका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, जिसे दूर किया जाना चाहिए।

हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति हर्मिनी ने किया स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉक्टर पैट्रिक हर्मिनी के विशेष निमंत्रण पर शनिवार को सेशेल्स पहुंचे। सेशेल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हर्मिनी ने उनका भव्य स्वागत किया। प्रधानमंत्री को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। वह सेशेल्स राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। खास बात यह है कि भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना का यह 50वां वर्ष है।

संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय पीएम होंगे
पीएम मोदी सेशेल्स की संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे। पीएम ने दिल्ली से रवाना होने से पहले दिए बयान में कहा, यह अवसर हमारी साझा लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत संसदीय परंपराओं को दर्शाता है जो दोनों देशों को आपस में जोड़ती हैं। इससे पहले फरवरी में सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉक्टर पैट्रिक हर्मिनी ने भारत का दौरा किया था।

रक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच अहम कड़ी
भारत ने सेशेल्स को गश्ती पोत, तटीय रडार निगरानी प्रणाली, डोर्नियर विमान और सैन्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है। दोनों देशों के बीच होने वाला सैन्य अभ्यास लामितिये अब तीनों सेनाओं की भागीदारी वाला अभ्यास बन चुका है। इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी से जुड़े नए समझौतों और एक गश्ती पोत के हस्तांतरण की योजना भी है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई दिशा दी और समुद्री सुरक्षा पर साझेदारी लगातार मजबूत होती गई।

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