इस वर्ष धान खरीदी के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता खत्म किया जाये – कांग्रेस

Indiareporter Live
शेयर करे

इंडिया रिपोर्टर लाइव

रायपुर, 11 सितंबर 2026। कांग्रेस ने मांग किया है कि इस वर्ष धान खरीदी में एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता को खत्म किया जाये। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि एग्रीस्टेक पंजीयन में अनिवार्यता के कारण पिछले वर्ष 7 लाख से अधिक किसान अपना धान नहीं बेच पाये थे। सरकार ने एग्रीस्टेक पंजीयन में आने वाली परेशानी को बिना दूर किये इस वर्ष भी इसी पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य कर दिया है। बिना पंजीयन के धान खरीदी नहीं होगी इससे किसानों की परेशानी बढ़ेगी। सरकार भूमि के रिकार्ड ऋण पुस्तिका, खसरा, खतौनी, बी-1 और पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर किसानों से खरीदी करे।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आधे अधूरे तैयारी और तकनीकी खामियों को दुरुस्त किए बिना पंजीयन की अनिवार्यता थोपना किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। सरकार के द्वारा बनाए गए खुद के पोर्टल में अपडेट नहीं है। कृषि भूमि का विवरण, वारिसाना हक प्रकरण और नई खरीदी/बिक्री के आंकड़े दर्ज नहीं है, मृत्यु के बाद भी कई खसरों में मुखिया का नाम ही प्रदर्शित हो रहा है जिससे नए खाता धारकों का पंजीयन पोर्टल पर जबरिया रिजेक्ट किया जा रहे हैं। पिछले कई महीनो से ऑनलाइन अनुमोदन नहीं होने से बंटवारे की भूमि में नक्शा काटना बंद कर दिया गया है। सरकार के विभागों में आपसी समन्वय का अभाव है राजस्व विभाग, कृषि विभाग, पंचायत और ग्रामीण तथा सहकारिता विभाग के आंकड़े आपस में मैच नहीं हो रहे हैं। आधार कार्ड में दर्ज किसान के नाम, पिता या पति के नाम राजस्व विभाग के खतौनी से मिल नहीं खाता है, इसकी सजा भी किसानों को दी जा रही है, अब प्रदेश के लाखों किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि बिना पंजीयन के उनका धान बिकेगा कैसे?
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार के डिजिटल कृषि मिशन एग्री स्टैक पोर्टल के नई व्यवस्था में भूमि के खसरे से जुड़े सभी हिस्सेदारों का ई-केवाईसी और पंजीयन अनिवार्य किए जाने से विवाद और परेशानियां सामने आ रही हैं। संयुक्त खाते वाली जमीनों में कई हिस्सेदार गांव से बाहर, दूसरे शहरों में नौकरी या मजदूरी कर रहे होते हैं। धान बेचने के लिए सभी हिस्सेदारों का बायोमेट्रिक/आधार ई-केवाईसी या भौतिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होने से प्रक्रिया अटक रही है। पैतृक जमीनों में अक्सर आधिकारिक बंटवारा नहीं हुआ रहता है। पंजीयन के लिए सभी सह-खातेदारों की सहमति या ई-केवाईसी न मिलने के कारण पंजीयन पूरा होने में अड़चनें आ रही हैं। एग्री स्टैक पोर्टल, भू-अभिलेख, भुइयां पोर्टल और आधार सर्वर का आपस में समन्वय सही न होने से ओटीपी न आना, बायोमेट्रिक मिसमैच और रकबा प्रदर्शित न होने जैसी शिकायतें लगातार आ रही हैं। सरकार की तकनीकी खामियों की वजह से कई ग्रामीण व वनांचल इलाकों में डिजिटल साक्षरता की कमी और नेटवर्क की समस्या के कारण किसानों को सहकारी समितियों और सीएससी केंद्रों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लाइन लगाना पड़ रहा है। सरकार जटिल नियमों, पोर्टल की बाध्यता और हिस्सेदारों के पंजीयन की शर्त लगाकर वास्तविक किसानों को प्रक्रिया से बाहर करना चाहती है, ताकि समर्थन मूल्य पर खरीदी के लक्ष्य व बजट को कम किया जा सके।

Leave a Reply

Next Post

जल संरक्षण और हर घर तक स्वच्छ पेयजल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

शेयर करेजल जीवन मिशन की जिलेवार नियमित समीक्षा करें कलेक्टर, बाधाओं का तत्काल करें समाधान इंडिया रिपोर्टर लाइव रायपुर 11 सितंबर 2026। जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और […]

You May Like

मनेंद्रगढ़ में दवा दुकानों पर प्रशासन का छापा....|....अवैध शराबकांड में दस से ज्यादा मौतें....|....वाणिज्यिक कर अधिकारी की संपत्ति आय से 2.64 गुना, लोकायुक्त का छापा....|....ननि में खरीदी की अनियमितताओं पर रामेश्वर शर्मा बोले-सरकार ने खुद संज्ञान लिया....|....मालू को मिली नई पहचान: रेशों से बनेगा पर्यावरण अनुकूल कपड़ा....|....कारोबारियों ने फिर लिखी राहुल को चिट्ठी....|....मायावती ने राजनीतिक बयानबाजी पर जताई चिंता....|....मेलानिया ट्रंप की पहल पर ओलेश्की में स्थानीय संघर्षविराम लागू....|....कांग्रेस की रैली से घबराई मोदी सरकार के दबाव में रेलवे ने कांग्रेस को स्पेशल ट्रेन देने से मना किया....|....पटवारियों की हड़ताल से किसान परेशान - कांग्रेस