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माजुली 29 दिसंबर 2023। पूर्वोत्तर संत मणिकंचन सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शिरकत की। गुरुवार को सम्मेलन को संबोधितक करते हुए उन्होंने कहा कि हर देश की अपनी अनूठी जीवन शैली होती है, जो उसकी संस्कृति से आती है। भारत की संस्कृति में ‘एकम सत् विप्रा बहुधा वदन्ति’ का सिद्धांत प्रतिबिंबित होता है। सर्व समावेशी परंपरा केवल दुनिया में भारत देश में ही मौजूद है।
आध्यात्मिक नेताओं को समाज के लिए आगे आना होगा-भागवत
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के देशों को शांति और सह अस्तित्व का संदेश देने के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए। महान कार्यों को पूरा करने के लिए हमारे समाज में आध्यात्मिक गुरुओं को आगे आना होगा। संबोधन में उन्होंने कहा कि हमें अपनी विविधता का पालन करते हुए अपनी एकता को आगे बढ़ाना होगा। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि लोगों को सेवा,शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार के माध्यम से समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
मूल्यों, रीति रिवाजों की जागरूकता की जरूरत- भागवत
संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के आध्यात्मिक मूल्यों और रीति रिवाजों को बनाए रखने के लिए परिवारों में राष्ट्रीय जागरूकता की जरूरत हैं। सभी आध्यात्मिक नेताओं से इस संदेश और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आग्रह है। उन्होंने कहा जिस तरह असम के महान संत श्रीमंत शंकरदेव ने सामाजिक सुधार लाकर अपने महान जीवन का उदाहरण दिया। उसी तरह हम सभी को अपने परोपकारी व्यवहार के माध्यम से अपने समाज के भीतर विभिन्न सामाजिक बुराइयों को खत्म करना होगा।
बता दें कार्यक्रम में असम में 48 सत्रों और पूरे पूर्वोत्तर राज्यों के 37 विभिन्न धार्मिक संस्थानों और संप्रदायों से जुड़े कुल 104 आध्यात्मिक नेताओं ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कई आध्यात्मिक परंपराओं और समुदायों के बीच समन्वय, सद्भावना को आगे बढ़ाना था।