
इंडिया रिपोर्टर लाइव
कोण्डागांव, 11 सितम्बर 2020। जिले में 01 से 30 सितम्बर तक भारत सरकार द्वारा मनाये जाने वाले राष्ट्रीय पोषण माह 2020 के अंतर्गत महिला बाल विकास विभाग द्वारा अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। जिसके अंतर्गत पूरे जिले में राज्य शासन के आदेशानुसार आंगनबाड़ी केन्द्रों से 03 से 06 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क गर्म भोजन वितरण की व्यवस्था पुनः प्रारम्भ की गई है साथ ही कुपोषित बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को घर पहुंच पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट पैकेट) प्रदाय किया जा रहा है। जिससे इस आपदा काल में भी बच्चों में पोषण के स्तर में कमी ना आये। इसके साथ ही महिलाओं एवं बालिकाओं में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचने के लिए उनमें संतुलित आहार एवं स्वस्थ खान-पान की आदतों के विकास हेतु घर-घर जाकर गृहभंेट कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में छोटे बच्चों, बालिकाओं एवं गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है साथ ही कार्यकर्ताओं के द्वारा गृहभेंट कर कोरोना काल में बरती जाने वाली सावधानियों से अवगत भी कराया जा रहा है। पोषण माह को बच्चों एवं युवाओं में उज्जवल भविष्य के लिए सहीं पोषण स्तर की आवश्यकता को समझाते हुए उनमें स्वस्थ तन में स्वस्थ मन के विकास और स्वस्थ मन से सर्वोत्तम कार्य क्षमता एवं उत्पादकता की भावना का प्रसार करना है। एक अच्छी कार्य क्षमता एवं उत्पादकता वाले युवाओं के समाज से ही एक विकसित राष्ट्र की संकल्पना की जा सकती है। इसलिए पोषण माह में लोगों में जागरूकता प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।
कोण्डागांव में पोषण माह के दौरान पोेषण जागरूकता के लिए ‘‘सहीं पोषण देश रौशन नहीं रहे कहीं कुपोषण‘‘ जैसे स्लोगनों (नारों) को ग्राम के विभिन्न चैक चैराहों एवं दिवारों पर लिखकर सुपोषण का संदेश जन-जन तक देने का कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है।
इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी वरूण सिंह नागेश ने बताया कि सुपोषण माह में गर्म भोजन वितरण, गृहभेंट एवं नारा लेखन जैसे कार्यों के साथ जिले में कलेक्टर के निर्देश पर संचालित अभिनव पहल के तहत् ‘नंगत पीला‘ अभियान संचालित किया जा रहा है। जिसके माध्यम से 06 माह के भीतर 12 हजार से अधिक कुपोषित पाये गये बच्चों में कुपोषण के कारणों की पहचान कर सामाजिक एवं व्यवहारिक आदतों में परिवर्तन के माध्यम से कुपोषण को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।