‘नीतियों को बनाने में जनता की भागीदारी आवश्यक’, कानून व्यवस्था के बेहतरी को लेकर बोले ओम बिरला

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नई दिल्ली 28 अक्टूबर 2024। भारत में कानून व्यवस्था की बेहतरी को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में कानून और सार्वजनिक नीतियों के निर्माण में जनता की अधिक भागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि जब भी कोई नया कानून सार्वजनिक डोमेन में रखा जाए तो वे अपने विचार और सुझाव व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर अपना विचार व्यक्त करने से एक बार लागू किए गए कानून का लोगों, राज्य और पूरे देश पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ता है। बता दें कि एक दिवसीय दौरे पर ओडिशा पहुंचे बिरला ने रविवार को यहां रामा फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक बैठक में भी भाग लिया।

स्कूल के उद्घाटन में बोले ओम बिरला
जानकारी के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने ओडिशा दौरा के दौरान यहां केआईआईटी स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी का उद्घाटन करने आएं थे। जहां उन्होंने कहा कि हालांकि कानून और नीतियों के निर्माण में जनता की भागीदारी है, लेकिन मुझे लगता है कि यह अपर्याप्त है और इसे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने नागरिक-केंद्रित नीतियों की वकालत की, जिसमें सभी हितधारकों को शामिल किया जाए, समान अधिकार सुनिश्चित किए जाएं और लोगों के प्रति जवाबदेह हों।

सार्वजनिक नीति के महत्व पर दिया जोर
स्कूल के उद्घाटन के दौरान ओम बिरला ने शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, न्यायाधीशों और छात्रों के दर्शकों को संबोधित किया। जहां उन्होंने देश के भविष्य को आकार देने में सार्वजनिक नीति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक नीतियों को इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए कि समाज के सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों का लोकतंत्र में दृढ़ विश्वास है। जिन लोगों ने लोकतंत्र पर हमला करने का प्रयास किया उन्होंने जनता का विश्वास खो दिया है।

कोविड-19 महामारी पर बोले ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आगे लोकतंत्र की कार्य प्रणाली को लेकर कहा कि लोकतंत्र हमारे कामों और कार्य प्रणाली में है और हम सभी एकजुट होकर चुनौतियों का मुकाबला करते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान हमने दुनिया को अपनी ताकत दिखाई।

दुनिया एक परिवार के सिद्धांत का आह्वान
इसके साथ ही बिरला ने कहा भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी विविधता इसकी ताकत है। एक अच्छी तरह से तैयार की गई सार्वजनिक नीति एक मजबूत राष्ट्र की नींव है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब वसुधैव कुटुम्बकम या दुनिया एक परिवार है के सिद्धांत पर आधारित शांति को बढ़ावा देने वाली नीतियों के लिए भारत की ओर देख रही है। 

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