
इंडिया रिपोर्टर लाइव
सीकर 23 जनवरी 2026। राजस्थान के सीकर जिले में पूर्व सरपंच सरदार राव की हत्या के बहुचर्चित मामले में करीब 9 साल बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (SC-ST कोर्ट) रेणुका हुड्डा ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और एक अन्य आरोपी यतेंद्र पाल को सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं, मामले में शामिल तीन आरोपियों को आजीवन कारावास और छह दोषियों को 10-10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई गई है। एक आरोपी सुभाष बराल अब भी फरार है।
कैसे हुई थी सरदार राव की हत्या?
23 अगस्त 2017 को दोपहर करीब 12:40 बजे सीकर के पलसाना कस्बे में नेकीराम की किराना दुकान पर बैठे पूर्व सरपंच सरदार राव पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई थीं। एक कार दुकान के सामने रुकी, जिसमें सवार बदमाश पहले से जानते थे कि सरदार राव वहीं मौजूद हैं। दो हमलावर दुकान में घुसे और बेहद करीब से फायरिंग की। महज 10 सेकंड के भीतर कई गोलियां दागकर आरोपी फरार हो गए और सरदार राव की मौके पर ही मौत हो गई।
चुनावी रंजिश बनी हत्या की वजह
जांच में सामने आया कि सरदार राव वर्ष 2010 से 2014 तक जुराठड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच रह चुके थे। 2015 में चुनाव हारने के बाद भी वे आगामी उपचुनाव में मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। इसी चुनावी प्रतिस्पर्धा और हार के डर के चलते हरदेव राम ने जेल में बंद सुभाष बराल के जरिए हत्या की सुपारी दिलवाई। प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, सुभाष बराल ने इस साजिश में लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क से संपर्क किया था।


