बरेली में आस्था और अध्यात्म का संगम, कैलाश खेर के सुरों पर थिरका शहर, शिवभक्ति में डूबे लोग

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

बरेली 27 फरवरी 2026। लेजर लाइटों से जगमगाता ‘शिवोहम’ का मंच, हर-हर महादेव उद्घोष से गूंजता परिसर और पद्मश्री कैलाश खेर के स्वर। इन सबका संगम हुआ तो बृहस्पतिवार को बरेली में शाहजहांपुर रोड स्थित कॉम्पिटेंट इंटरनेशनल सिटी में सजे मंच की गूंज पूरे शहर ने महसूस की। 15 हजार शहरवासियों ने शिव का वर्चुअल साक्षात्कार किया। पूरी नाथ नगरी बगड़ बम बबम… की स्वर लहरी पर झूम उठी। अमर उजाला की ओर से आयोजित शिवोहम के शुभारंभ से दो घंटे पूर्व ही सैकड़ों की तादाद में शहरवासी पहुंचने लगे थे। शाम छह बजे से मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर शुरू हुआ। सबसे पहले कैलासा बैंड ने शिवोहम अर्थात मैं ही शिव हूं… की प्रस्तुति दी। 12 ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति और शिव-शक्ति के मिलन की कथा की आकर्षक प्रस्तुति से श्रोता झूम उठे। एलईडी स्क्रीन पर रुद्राभिषेक और काशी विश्वनाथ धाम में पूजा का सजीव प्रसारण देखकर लोग आस्था और अध्यात्म के रंग में रंगे नजर आए। 

फिर गणेश वंदना वक्रतुंड महाकाय की नृत्य प्रस्तुति के बाद मुख्य यजमानों ने रुद्राभिषेक किया। शिव एआई स्टोरी में शिव का डमरू, ओम का रहस्य, समुद्र मंथन, नंदी, अमरनाथ यात्रा, त्रिशूल, नागेश्वर की प्रस्तुतियां हुई। कैलाश खेर ने आदियोगी के भजनों के साथ मंच पर कदम रखा तो परिसर तालियों से गूंज उठा। क्रमशः मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया, आओ जी.. आओ जी, तौबा तौबा रे तेरी सूरत, तू जाने ना, सोई सोई सेज, पिया के रंग रंगदीनी ओढ़नी, कौन है वो कौन है कहां से वो आया, क्या कभी अंबर से सूर्य बिछड़ता है, प्रीत की लत मोहे ऐसी लगी आदि भजन और फिल्मी गीत सुनाकर लोगों को थिरकने पर विवश कर दिया।

महादेव की नगरी है बरेली, सनातन संस्कृति से जुड़ने का आह्वान
दर्शकों से रूबरू कैलाश खेर ने कहा कि बरेली की पहचान दशकों पहले झुमका गिरा रे गीत से हुई, लेकिन यहां के नाथ मंदिर सदियों पुराने हैं। इसे नाथ नगरी नहीं, बल्कि महादेव नगरी के नाम से पुकारा जाना चाहिए। हजारों लोगों की मौजूदगी इसका प्रमाण है कि बरेली वाले जाग गए हैं। जो नहीं जागे हैं, उनसे सनातन संस्कृति की ओर लौटने का आह्वान किया। 

वैदिक मंत्रोचार के साथ हुआ रुद्राभिषेक, गूंजा हर-हर महादेव
शिवोहम के आध्यात्मिक वातावरण के बीच रुद्राभिषेक का भव्य आयोजन किया गया। पंडित जनार्दन पांडेय ने अनुष्ठान को संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान आशुतोष का दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक किया गया। पंडित जनार्दन पांडेय ने कहा कि रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए किया जाने वाला वैदिक अनुष्ठान है। इसमें मंत्रोच्चारण के साथ शिवलिंग पर अभिषेक किया जाता है। यह जीवन से दुखों, रोगों, दरिद्रता और नकारात्मकता को नष्ट करता है। साथ ही, सुख-समृद्धि, सफलता और मानसिक शांति की प्राप्त होती है। 

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