
इंडिया रिपोर्टर लाइव
रायपुर, 31 जुलाई 2026। सोशल मीडिया पर आरक्षण को खत्म करने की चल रहे बहस को संघ प्रायोजित षडयंत्र बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि देश के छात्रों और युवाओं के द्वारा उठाए जा रहे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ही आरक्षण विरोधी मुहिम चलाया जा रहा है। भाजपा और आरएसएस मूलतः संविधान विरोधी है, आरक्षण विरोधी है। शोषित और वंचित वर्ग को अवसर की समानता के लिए ही आरक्षण के अधिकार उन समुदायों को प्राप्त है। आर एस एस आरंभ से ही आरक्षण की विरोधी रही है एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था का विरोध दबी जुबान से संघी भाजपाई करते रहे हैं।कांग्रेस आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को तत्काल हटाने की मांग करती है, इसे और अधिक विस्तार देने तथा निजी संस्थानों में भी इसका कड़ाई से पालन कराने की पुरजोर वकालत करती है। संख्या के अनुपात में एसटी, एससी और ओबीसी को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए केंद्र सरकार ने प्रावधान कर दिया है तो राज्य में नौकरी और शिक्षा में इसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा है? दिसंबर 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा से सर्वसम्मति से पारित 76 प्रतिशत नवीन आरक्षण विधेयक राजभवन में अब तक क्यों लंबित है?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता हमारे संविधान की मूल भावना में निहित है। कमजोर वर्ग के उत्थान और उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिएआरक्षण जरूरी है, तथा आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने के किसी भी विचार या सोशल मीडिया ट्रेंड का कड़ा विरोध करते हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि देश के हर नागरिक को विकास का हक़ मिले, पिछड़ापन दूर हो, यही आरक्षण के प्रावधान का मूलभूत सिद्धांत है। विगत 75 वर्षों में स्थितियां सुधरी है लेकिन यह नकाफी है, कई राज्यों में आरक्षण की सीमा 65 और 75 प्रतिशत से ज्यादा है ऐसे में 50 प्रतिशत तक की लिमि


