बिलासपुर में मेट्रो-सिटी की तरह काम करने ट्रैफिक-पुलिस का दावा, लोग बोले-चालान वसूली का नया फंडा

इंडिया रिपोर्टर लाइव
बिलासपुर, 31 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में न तो चौक-चौराहों पर व्यवस्था है और न ही बेहतर सड़कें। यहां तक सिग्नल पाइंट पर लेफ्ट फ्री का भी इंतजाम नहीं है। इसके बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के बहाने अब सिग्नल संचालन का समय बढ़ा दिया है। अब शहर के सभी सिग्नल सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक चालू रहेंगे। यानी तेज बारिश, जलभराव और खराब सड़क व्यवस्था के बीच भी वाहन चालकों को सिग्नल पर रुकना होगा। नियम तोड़ने पर आईटीएमएस के जरिए ऑनलाइन चालान सीधे मोबाइल पर पहुंचेगा। स्मार्ट सिटी और पुलिस विभाग का तर्क है कि इससे लोगों में ट्रैफिक सेंस विकसित होगा और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन शहर की मौजूदा स्थिति में यह व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। शहर के कई चौराहे अभी भी सिग्नल के अनुकूल नहीं हैं। कम चौड़े चौराहों और तिराहों पर सिग्नल लगने से वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं।
किसी चौक पर नहीं है लेफ्ट फ्री
वहीं, लेफ्ट टर्न पर कहीं पान की दुकान तो कहीं चाय की दुकानें संचालित हो रही हैं। बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर भी वाहन चालकों के लिए परेशानी बने हुए हैं। कई जगह स्टॉप लाइन तक स्पष्ट नहीं है। शहर के लोगों का कहना है कि व्यवस्था सुधारने की बजाय सिर्फ चालानी कार्रवाई बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अधूरी ट्रैफिक व्यवस्था के बीच सिग्नल का समय बढ़ाना लोगों के लिए परेशानी और बेजा वसूली जैसा लग रहा है।
जहां जरूरत नहीं, वहां भी लगा रहे सिग्नल, चालान वसूलने का नया तरीका
स्मार्ट सिटी और पुलिस विभाग की ओर से कई ऐसे स्थानों पर भी सिग्नल लगाए जा रहे हैं, जहां फिलहाल इसकी जरूरत महसूस नहीं हो रही है। हाल ही में शिव टॉकीज चौक पर सिग्नल लगाया गया है। यहां सिग्नल लगने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था सुधरने की बजाय वाहनों की कतार और बढ़ गई है। कुछ इसी तरह का हाल सरकंडा क्षेत्र में भी है। यहां मुख्य मार्ग पर जगह-जगह सिग्नल और सड़क की कम चौड़ाई के कारण जाम की स्थिति बन रही है। गांधी चौक, बस स्टैंड और इंदिरा गांधी चौक जैसे प्रमुख तिराहे-चौराहे पहले ही लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
बारिश में सिग्नल तक पहुंचना भी चुनौती
बारिश के दौरान सिग्नल वाले चौराहों तक पहुंचना भी वाहन चालकों के लिए बड़ी समस्या बन रही है। 17 जुलाई और 27 जुलाई को हुई बारिश के बाद श्रीकांत वर्मा मार्ग और सीएमडी चौक जैसे सिग्नल वाले क्षेत्र जलमग्न हो गए थे। ऐसे में वाहन चालकों को बारिश और जलभराव के बीच सिग्नल पर रुकने की मजबूरी होगी।
नगर निगम के 13 और स्मार्ट सिटी के 24 सिग्नल
शहर में नगर निगम के 13 और स्मार्ट सिटी के 24 सिग्नल लगाए गए हैं। इनमें नगर निगम के 9 और स्मार्ट सिटी के 22 सिग्नल वर्तमान में चालू हैं। हालांकि इनमें से गिने-चुने सिग्नलों पर ही यातायात पुलिस के जवान तैनात किए जाते हैं।
68 ट्रैफिक पाइंट, जरूरत 136 जवानों की, तैनात सिर्फ 121
नगर निगम, स्मार्ट सिटी और यातायात पुलिस के संयुक्त सर्वे के बाद शहर में 37 सिग्नल समेत 68 ट्रैफिक पाइंट चिन्हित किए गए हैं। नियमों के अनुसार प्रत्येक पाइंट पर कम से कम दो जवानों की ड्यूटी होनी चाहिए। इसके हिसाब से 136 जवानों की जरूरत है, जबकि यातायात पुलिस के पास कुल 121 अधिकारी और जवान हैं।
82 अधकारी और जवानों की है कमी
यातायात विभाग में एएसपी, डीएसपी, टीआई समेत 5 राजपत्रित अधिकारी, 2 एसआई, 10 एएसआई, 33 प्रधान आरक्षक और 71 आरक्षक शामिल हैं। विभाग के कुल स्वीकृत 203 पदों की तुलना में 82 अधिकारी और जवानों की कमी है।
ट्रैफिक एएसपी बोले- मेट्रो सिटी में लोग सिग्नल पर रुकते हैं
एडिशनल एसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे ने कहा कि अब सिग्नल का समय सुबह 6 से रात 12 बजे तक करने का आदेश जारी किया गया है, जो आज से प्रभावी होगा। सुबह बुलेट सवार स्टंट कर रहे हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया है। मेट्रो सिटी में लोग सिग्नल पर रुकते हैं, वहां बारिश, धूप जैसी कोई बात नहीं होती। ट्रैफिक लोड बढ़ रहा है, इसे मैनेज करने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।


