सिंधिया समर्थक और वरिष्ठ मंत्रियों की खींचतान में अटका विभागों का बंटवारा

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

भोपाल 07 जुलाई 2020। मध्य प्रदेश में शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार के पांच दिन बाद भी मंगलवार को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ दो दिन मंथन किया। माना जा रहा था कि वे भोपाल लौटते ही मंत्रियों को विभाग आवंटित कर देंगे, लेकिन उन्होंने यह कहकर मंत्रियों की बैचेनी और बढ़ा दी कि वे अभी एक दिन और इस पर काम करेंगे। 

पांच मंत्रियों को पहले से आवंटित विभागों में भी होगा परिवर्तन

दरअसल, विभागों का बंटवारा मंत्रिमंडल में शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक और वरिष्ठ मंत्रियों की खींचतान में अटका हुआ है। 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के मद्देनजर सिंधिया अपने समर्थक मंत्रियों को बड़े विभाग दिलाना चाहते हैं, ताकि क्षेत्र में सकारात्मक संदेश जाए। बताया जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री भी इससे सहमत हैं पर वरिष्ठ मंत्रियों की अनदेखी भी न हो, इसके लिए संतुलन बनाने की कवायद चल रही है। माना जा रहा है कि पांच मंत्रियों को पहले से आवंटित विभागों में भी कुछ परिवर्तन होगा। 

दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ दो दिन मंथन करने के बाद भोपाल लौटे मुख्यमंत्री 

सूत्रों के मुताबिक, शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार भी केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद ही संभव हो पाया था। ठीक यही स्थिति विभागों के बंटवारे को लेकर भी बन रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने नई दिल्ली में रविवार और सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से विभाग आवंटन के मुद्दे पर लंबी चर्चा की। 

विभागों में संतुलन बनाने की कवायद 

बताया जा रहा है कि सिंधिया कोटे के मंत्रियों के लिए बड़े माने जाने वाले विभाग मांगे जा रहे हैं। मामला नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, परिवहन, वाणिज्यिक कर, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्योग और जल संसाधन विभाग को लेकर उलझा हुआ है। मुख्यमंत्री इनमें से कुछ विभाग देने पर तो सहमत हैं, लेकिन कुछ विभाग वरिष्ठ मंत्रियों (गोपाल भार्गव, जगदीश देवड़ा, विजय शाह, भूपेंद्र सिंह, यशोधराराजे सिंधिया) को देना चाहते हैं, ताकि संतुलन बना रहे।

वैसे भी सियासी समीकरणों के चलते कुछ वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल पाया, जिसे लेकर असंतोष भी सतह पर आ चुका है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने दो दिन दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ सभी पहलुओं पर चर्चा की। हालांकि, अंतिम निर्णय अभी तक भी नहीं हो पाया है। माना यह भी जा रहा है कि पांच मंत्रियों (डॉ. नरोत्तम मिश्रा, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, कमल पटेल और मीना सिंह) में से कुछ के विभागों में भी परिवर्तन किया जा सकता है। कुछ राज्यमंत्रियों को विभागों का स्वतंत्र प्रभार देने पर भी विचार किया गया है।

चुनावी समीकरणों पर भी ध्यान

सूत्रों का कहना है कि जिस तरह मंत्रिमंडल विस्तार में 24 विधानसभा के उपचुनाव के समीकरणों को ध्यान में रखा गया, ठीक वैसा ही विभागों के बंटवारे को लेकर भी हो रहा है। बताया जा रहा है कि आमजन से सीधा सरोकार रखने वाले विभागों को मुख्यमंत्री ऐसे मंत्रियों के पास रखना चाहते हैं, जिनके पास उपचुनाव जैसी परिस्थिति में काम करने और कराने का पूर्व अनुभव हो। चाहे गृह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय विकास हो या फिर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, इनका सीधा वास्ता चुनावी जमावट से रहता है। 

16 विधायक पहली बार बने हैं मंत्री

मंत्रिमंडल में 16 नेता तो ऐसे हैं जिन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने का पूर्व अनुभव नहीं है। इनमें आठ (एदल सिंह कंषाना, प्रेम सिंह पटेल, ओमप्रकाश सकलेचा, उषा ठाकुर, अरविंद भदौरिया, डॉ. मोहन यादव, हरदीप सिंह डंग, राजवर्द्धन सिंह) कैबिनेट और आठ (भारत सिंह कुशवाहा, इंदर सिंह परमार, रामखेलावन पटेल, रामकिशोर कावरे, बृजेंद्र सिंह यादव, गिर्राज डंडौतिया, सुरेश धाकड़, ओपीएस भदौरिया) राज्यमंत्री बनाए गए हैं।

विभागों में कामकाज हो रहा है प्रभावित

सूत्रों का कहना है कि विभागों का बंटवारे में लग रहे समय का असर कामकाज पर भी पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों ने मंत्रियों को कभी भी विभाग आवंटित होने की स्थिति को देखते हुए प्रशासकीय निर्णय के लिए फाइलें फिलहाल मुख्यमंत्री समन्वय में भेजना बंद कर दिया है। 

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