बीएचयू में बोले अभिनेता संजय मिश्रा

इंडिया रिपोर्टर लाइव
वाराणसी, 16 सितंबर 2026। बीएचयू में जंतु विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित अन्विति कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा ने शिक्षा व्यवस्था और अपने अनुभवों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, मैं पढ़ने में कभी अच्छा नहीं रहा। मुझे एजुकेशन सिस्टम से ही दिक्कत है। इतिहास पढ़ाओ मत, मुझे इतिहास दिखाओ। पढ़ा दोगे तो मैं परीक्षा पास कर लूंगा, इसके बाद वो भी इतिहास हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इतिहास को देखकर ही छात्र अपना भविष्य लिख सकते हैं। मुझे दिखाकर जब जड़ें मजबूत करोगे तो मैं अपने हिसाब से पैर फैलाऊंगा। मुझे इतिहास के हर कोने से मतलब नहीं है। मुझे किसी खास कोने में ही जाना है।
संजय मिश्रा ने बताया कि वह आज भी फिल्मों की स्क्रिप्ट नहीं पढ़ते। हालांकि, पहली बार चाणक्य की शूटिंग के दौरान एक शॉट के लिए उन्हें 28 टेक देने पड़े थे। इस पर सीनियर कलाकार नाराज हुए।
मैं माहौलबाज हूं
संजय मिश्रा ने कहा कि बनारस में मेरी एक अलग जिंदगी है। यहीं जीता हूं। जब भी खाली होता हूं तो यहीं आ जाता हूं। मैं किसी शहर को छोटा नहीं करना चाहता, लेकिन बनारस का अपना अलग मिजाज है। ये एनर्जेटिक शहर है। उन्होंने कहा, बनारस हमेशा माहौल देता है और मैं माहौलबाज हूं। यहां की गलियों में हम गमछा पहनकर घूमे हैं।
प्रोफेशन को समय देते हुए दिल की आवाज न अनसुनी करें
छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए संजय मिश्रा ने कहा कि प्रोफेशन को समय देते हुए दिल की आवाज को अनसुना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कवि घाघ की कविता का उल्लेख करते हुए कहा, जरूरी है, आप बढि़ए, लेकिन अपनी जड़ें मत छोड़िए। अपनी जमीन को जानिए। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्देशक भी मातृभाषा के जरिये अपनी संस्कृति से जुड़ता है। केंद्रीय विद्यालय के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि स्कूल में भारत का नक्शा बनाने में उनका भी योगदान रहा है।
आधा घंटे देरी से पहुंचे मिश्रा, 500 सीट, पहुंचे 700 विद्यार्थी
हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी प्रकाशन समिति की ओर से ये आयोजित कार्यक्रम में अभिनेता संजय मिश्रा करीब आधा घंटे देरी से पहुंचे। इस बीच 500 सीट वाले हॉल में 700 से ज्यादा विद्यार्थी पहुंचकर खड़े ही रहे। जैसे ही संजय मिश्रा पहुंचे तो पूरा महामना सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और हर-हर महादेव के जयघोष पर गूंज उठा। कार्यक्रम में पत्रिका अचिंत्य 6.0 का लोकार्पण किया गया, जिसका शीर्षक क्षितिज के परे रहा। संस्थान के निदेशक प्रो. संजय कुमार और डीन प्रो. अरुण देव सिंह ने संजय मिश्रा को सम्मानित किया। संचालन दीपांशी अग्रवाल और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चंद्रशेखर पति त्रिपाठी ने किया। इस दौरान आयोजक जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. एसके मिश्र, प्रो. राघव मिश्र, प्रो. रजनीकांत मिश्र, डॉ. भूपेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।


