हनुमान धाम-फूड वैली तक जलभराव

इंडिया रिपोर्टर लाइव
लखनऊ, 04 अक्टूबर 2026। गोमती बीते कई दिनों से उफान पर है। फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में घरों की दहलीज तक पानी पहुंच चुका है। बढ़ते जलस्तर के बीच नदी का पानी गोमतीनगर में लामार्टिनियर कॉलेज के पीछे निर्माणाधीन फ्लाईओवर की करीब 30 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री बहा ले गया है। पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि काम करवा रहे अधिकारी और कर्मचारी स्टोर से कागज तक नहीं समेट सके।
लामार्टिनियर कॉलेज के पीछे एलडीए जी-2 फ्लाईओवर का निर्माण करवा रहा है। कार्यदायी कंपनी एनसीसी के स्टोर मैनेजर मंतोष श्रीवास्तव ने बताया कि तीन दिन से गोमती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। इस बीच उम्मीद थी कि बारिश थमने से पानी भी उतरेगा। हालांकि, शुक्रवार दोपहर बाद अचानक पानी बढ़ा और स्टोर व अन्य अस्थायी कमरों में घुस गया। सामान निकालने तक का मौका नहीं मिल सका। इससे करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मंतोष श्रीवास्तव ने बताया कि करीब 10 करोड़ रुपये की शटरिंग, पांच हजार लीटर डीजल, 12 ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑयल-लुब्रिकेंट के 20 ड्रम, राशन, गैस सिलिंडर, सरिया व अन्य सामग्री पानी के साथ बह गई। इसके अलावा पांच जेनरेटर व एक डीजल टैंकर पानी में डूब गया।
सेज क्रिकेट स्टेडियम के अंदर पहुंचा पानी
गोमती का पानी सेज क्रिकेट स्टेडियम के अंदर पहुंच गया है। शुक्रवार को मैदान लबालब रहा। इस कारण सेज क्रिकेट एकेडमी को फिलहाल बंद कर दिया गया है। मैदान पर पानी भरा होने से खिलाड़ी अभ्यास भी नहीं कर पाए। अगले कुछ दिनों तक यहां क्रिकेट के मुकाबले नहीं होंगे। स्टेडियम से पानी निकालने के लिए तीन पंपिंग सेट लगाए गए हैं। पानी कई दिन भरा रहा तो इससे मैदान के खराब होने की भी आशंका है। उधर, इकाना स्टेडियम प्रांगण के बाहर भी पानी पहुंच गया है। यह स्टेडियम के अंदर न पहुंचे इसके लिए नाले को मिट्टी डालकर बंद करा दिया गया है।
जलस्तर के साथ बढ़ी लोगों की चिंता
गोमती का पानी नाले के रास्ते एमार गोमती ग्रींस की ओर से बढ़ने लगा है। बहाव तेज होने से पानी नाले के पास सड़क पर पानी भर गया है। इससे एमार गोमती ग्रींस और आसपास की सोसाइटी में रहने वालों की चिंता बढ़ गई है। एमार गोमती ग्रींस रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, नगर निगम, बिजली निगम से गोमती के जलस्तर की निगरानी, सोसाइटी के बिजली उपकेंद्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और बचाव टीमों के नंबर उपलब्ध कराने की मांग की है।
हनुमान धाम पहुंचा पानी
गोमती का जलस्तर सामान्य से 2.44 मीटर यानी करीब आठ फीट ऊपर पहुंचकर 108.14 मीटर हो गया है। शनिवार को हनुमत धाम मंदिर परिसर तक इसका पानी पहुंच गया। प्राचीन शनि देव मंदिर व लक्ष्मण मेला मैदान के पास भी पानी भर गया है। उधर, गोमती में पानी बढ़ने के बाद रिवरफ्रंट की फूड वैली को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
इन दिनों फैजुल्लागंज में 200 से अधिक घर गोमती के पानी से प्रभावित हैं। हालात संभालने के लिए बैराज के सभी 10 गेट खोल दिए गए हैं। इससे पानी को डाउनस्ट्रीम की ओर तेजी से निकालने में मदद मिलेगी। नदी का पानी शहर के ड्रेनेज नेटवर्क में वापस न घुसे इसके लिए 48 आउटलेट बंद कर दिए गए हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य के अनुसार लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और सीतापुर की ओर से आ रहा पानी लखनऊ पहुंच रहा है। इस वजह से बारिश रुकने के बावजूद गोमती का जलस्तर बढ़ा है। उम्मीद जताई जा रही है कि ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी कम होने पर सोमवार से गोमती के जलस्तर में गिरावट शुरू हो सकती है।
30 नावों, चार राहत शिविरों से बाढ़ प्रभावितों को राहत
गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बीकेटी तहसील के लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर, अकड़िया मऊ समेत आसपास के गांवों में भरा पानी थोड़ा कम जरूर हुआ है, लेकिन पीड़ितों की मुश्किल अभी कम नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों के आवागमन व लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए 30 नावों की व्यवस्था की गई है। चार राहत शिविर एवं सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। यहां प्रभावित लोगों को भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। डीएम विशाख जी ने लगातार दूसरे दिन संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार के साथ नाव से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। डीएम ने राहत कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं होने देने के निर्देश दिए।
डीएम ने बताया कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को पका भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को राहत किट भी दी जा रही है। डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भी प्रभावित गांवों में पहुंच कर वहां आवश्यक दवाओं की किट और क्लोरीन की गोलियां बांटी हैं। पशुपालन विभाग ने पशुओं के लिए हरे चारे और भूसे की व्यवस्था की है। पशु चिकित्सकों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर पशुओं का उपचार कर रही हैं।
जिलाधिकारी ने राहत शिविरों और आपदा राहत सामग्री भंडारण केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखीं। प्रभावित क्षेत्रों में तैनात राजस्व, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग के कर्मचारियों से राहत कार्यों की जानकारी ली। अधिकारियों को जरूरत के अनुसार अतिरिक्त नाव और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
पानी में डूबने से बाल-बाल ही बचा बुजुर्ग
सुल्तानपुर, बहादुरपुर, हीरापुरवा, लासा के बाद शनिवार सुबह बाढ़ का पानी अकड़रिया गांव की सड़क पर भी भरने लगा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में पूरी फसल पांच से दस फिट तक पानी में डूब चुकी है। शनिवार सुबह लगभग आठ बजे बहादुरपुर गांव से पांच भैंसों को एक रस्सी से बांधकर बुजुर्ग पांचू बाढ़ में डूबी सड़क के पांच फीट गहरे पानी से बाहर आ रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने रस्सी अपने हाथ बांध रखी थी और आगे-आगे चल रहे थे, इसी बीच भैंसों ने रास्ता बदल दिया। तो पांचू गहरे पानी में डूबते-डूबते बचे।
माल में खेल से घरों तक पहुंचा पानी
जलस्तर लगातार बढ़ने से बसहरी और बहरौरा गांव में किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों गांवों में धान की पकी फसल के साथ उड़द, सब्जी और चारे के खेत पानी में डूब गए हैं। शनिवार को ग्रामीणों ने बताया कि सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो चुकी है। बसहरी निवासी सतीश ने बताया कि पानी भरने से उनके मकान का आधा हिस्सा डूब गया है। रमेश की गुमटी भी पानी में समा गई। बसहरी के ही बसंत का घर पानी में डूबने के बाद वह सामान और मवेशियों को लेकर दूसरे मकान में चले गए। दिनेश निषाद के घर के दरवाजे तक पानी पहुंच गया है।
सैथा में राहत-बचाव में उतरी नगर निगम की टीमें
दुबग्गा के लालजी टंडन वार्ड में सैथा समेत आसपास के गांवों में बिगड़े हालात की खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई तो नगर निगम प्रशासन हरकत में आया। जोनल अधिकारी मनोज यादव ने शनिवार को प्रभावित इलाकों में तीन राहत-बचाव कैंप लगवाने के साथ तीन नावें लगवाईं। नावों से पानी में फंसे लोगों को घरों से सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। सैंथा, दौलतखेड़ा, गुलमीखेड़ा, सुखलालखेड़ा, उमरावखेड़ा और जेहटा रोड स्थित हयातनगर मोड़ गांव में भी ग्रामीण मुश्किलों से घिरे हैं। करीब 500 बीघे से अधिक क्षेत्र में धान और सब्जियों की फसल जलमग्न हो गई है।


