71 देशों की AI प्रतिस्पर्धा में भारत चौथे स्थान पर; डिजिटल प्रदर्शन में जर्मनी समेत इन देशों को पछाड़ा

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 30 मई 2026। ‘स्टेट ऑफ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी’ (एसआईडीई) 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की पांचवीं सबसे अधिक डिजिटल अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। सीएचआईपीएस-एआई इंडेक्स में भारत, चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस एआई प्रतिस्पर्धा में 71 देश शामिल हैं। डिजिटल प्रदर्शन में भारत ने जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा को पीछे छोड़ दिया है। भारत ने डिजिटल रूप से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के व्यापार में 328 अरब अमेरिकी डॉलर कमाए हैं। यह दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एआई टैलेंट पूल का घर बन चुका है।

एआई का उपयोग, 72% लोग विकासशील देशों में 
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब एआई का उपयोग करने वाले 72% लोग विकासशील देशों में हैं, जबकि भारत और चीन मिलकर दुनिया में एआई अपनाने का लगभग दो-पांचवां हिस्सा रखते हैं। रि जनरेटिव एआई इतिहास की किसी भी पूर्व तकनीक की तुलना में सबसे तेज़ी से अपनाई जाने वाली तकनीक बन गई है। इसकी लॉंचिंग के तुरंत बाद ही यह विकासशील देशों में तेजी से लोकप्रिय हो गया है। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की संरचना में बड़ा परिवर्तन आया है। दुनिया की शीर्ष पांच डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में अब तीन देश — चीन, सिंगापुर और भारत — इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हैं, जो पारंपरिक उत्तरी अटलांटिक देशों के साथ एक नए त्रिध्रुवीय डिजिटल व्यवस्था के उभरने का संकेत देता है।

डिजिटल भरोसे को मजबूत बनाना चुनौती 
प्रमोद भसीन, चेयरपर्सन, आईसीआरआईआर के मुताबिक, भारत ने कनेक्टिविटी, उद्यमिता और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए मजबूत नींव तैयार की है। विकास का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि हम एआई का कितना प्रभावी उपयोग कर पाते हैं, नवाचार क्षमताओं को कितना आगे बढ़ाते हैं। जरूरी बात ये भी है कि हम डिजिटल भरोसे को कितना मजबूत बना पाते हैं। भारत ने वैश्विक रैंकिंग में आठवें स्थान से बढ़कर पांचवां स्थान हासिल किया है, जो बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच उसकी तेज़ डिजिटल प्रगति को दर्शाता है। वहीं, एआई इंडेक्स में भारत का चौथा स्थान – अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद – उसे एक उभरती हुई वैश्विक एआई शक्ति के रूप में इसके उभरने की पुष्टि करता है।

दूरदर्शी नीतिगत तैयारी की आवश्यकता
डॉ. दीपक मिश्रा, डिस्टिंग्विश्ड विजिटिंग प्रोफेसर, आईसीआरआईईआर ने कहा, भारत अब केवल डिजिटल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि एक डिजिटल लीडर के रूप में उभरा है। इस बड़े पैमाने की प्रगति को लगातार नवाचार और उत्पादकता में बदलने के लिए मजबूत संस्थानों, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक निवेश और दूरदर्शी नीतिगत तैयारी की आवश्यकता होगी। भारत का डिजिटल बदलाव अब तेजी से एआई अपनाने, फिनटेक नवाचार और तेज़ी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के जरिए आगे बढ़ रहा है। देश सॉफ्टवेयर, आईटी सेवाओं और क्लाउड आधारित समाधानों जैसी डिजिटल सेवाओं का वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण निर्यातक बनकर उभरा है। कम-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, भारत ने डिजिटल सेवाओं के व्यापार में लगभग 328 अरब अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा हासिल किया है।

बेहतर व्यावसायीकरण के रास्ते विकसित करना
भारत अब सिर्फ एक बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था नहीं रहा। यह दुनिया की सबसे प्रभावशाली एआई अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभर रहा है। प्रोसस में हम भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को एक दीर्घकालिक नवाचार साझेदार के रूप में समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सेहराज सिंह, वाइस प्रेसिडेंट, ग्रुप कॉरपोरेट अफेयर्स एंड पब्लिक पॉलिसी, प्रोसस ने यह बात कही है। भारत का अगला चरण कई महत्वपूर्ण फायदों और स्पष्ट अवसरों का संयोजन है। इसमें अमेरिका के बाद दुनिया में एआई प्रतिभा का दूसरा सबसे बड़ा समूह, बड़े पैमाने पर तकनीकी उपयोगकर्ता आधार और मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इन क्षमताओं को सतत मूल्य निर्माण में बदलने के लिए कंप्यूटिंग संसाधनों तक बेहतर पहुंच, जोखिम पूंजी को सक्रिय रूप से जुटाना, और विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स तथा उद्योग के बीच बेहतर व्यावसायीकरण के रास्ते विकसित करना जरूरी होगा।

कुछ चुनिंदा देशों और कंपनियों तक सीमित
रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि हालांकि एआई का उपयोग दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन अत्याधुनिक एआई अवसंरचना — जैसे उन्नत चिप्स, कंप्यूटिंग क्षमता और बड़े भाषा मॉडल — अब भी कुछ चुनिंदा देशों और कंपनियों तक सीमित है। आने वाले दशक में भारत की प्रतिस्पर्धी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी घरेलू एआई क्षमताओं को कितनी अच्छी तरह विकसित करता है और साथ ही अपने एप्लिकेशन-लेयर की मजबूती का कितना प्रभावी उपयोग करता है। हालांकि डिजिटलीकरण ने अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में बदलाव लाकर विकास को बढ़ावा दिया है। उन्हें कई लाभ पहुंचाए हैं, लेकिन इसके साथ नए जोखिम और छिपी हुई लागतें भी सामने आई हैं। ऑनलाइन वित्तीय अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी में तेज़ी से वृद्धि हुई है और अब ये देश में सबसे अधिक रिपोर्ट किए जाने वाले अपराधों में शामिल हैं। इसके अलावा, डिजिटल बहिष्करण का जोखिम और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी गंभीर चिंता के रूप में उभरकर सामने आई हैं।

अपराध की रोकथाम के लिए पर्याप्त निवेश हो
रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि तेज़ डिजिटलीकरण के साथ साइबर अपराध की रोकथाम के लिए पर्याप्त निवेश भी आवश्यक है। साथ ही, विकासशील देशों के पास उन पर्यावरणीय रूप से हानिकारक रास्तों से बचने का अवसर है, जिन्हें कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने डिजिटलीकरण के दौरान अपनाया था। साइड 2026 रिपोर्ट में उन्नत सीएचआईपीएस फ्रेमवर्क— कनेक्ट, हार्नेस, इनोवेट, प्रोटेक्ट और सस्टेन का उपयोग किया गया है। यह एक ऐसी पद्धति है जिसे विशेष रूप से इस बात को समझने के लिए बनाया गया है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएँ एआई के युग में कैसे आगे बढ़ रही हैं। यह विस्तारित फ्रेमवर्क उन देशों को कवर करता है, जो वैश्विक जीडीपी के 96%, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के 93% और दुनिया की 91% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे यह अब तक का सबसे व्यापक डिजिटल अर्थव्यवस्था बेंचमार्क बन गया है।

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