सरकार खुद उठाएगी पंजीयन शुल्क

इंडिया रिपोर्टर लाइव
भोपाल, 05 नवंबर 2026। मध्य प्रदेश सरकार स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की 87,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की निश्शुल्क रजिस्ट्री करवा रही है। योजना के अंतर्गत ग्रामीण नागरिकों को किसी भी प्रकार के वित्तीय भार से बचाने के लिए सरकार करीब 9,000 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क खुद वहन करेगी। सरकार इस राशि का भुगतान करने के लिए अगले वर्ष के बजट में आवश्यक प्रावधान करके पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग को अपने बजट से राशि उपलब्ध कराएगी।
49.5 लाख संपत्तियों का सर्वे पूरा
राज्य का राजस्व विभाग योजना के माध्यम से आबादी भूमि पर बने मकान, दुकान, खलिहान और खाली भूखंडों का मालिकाना हक उपभोगकर्ताओं को प्रदान कर रहा है। इसके लिए ड्रोन तकनीक की मदद से सर्वे करवाकर अब तक लगभग 49,52,567 संपत्तियों को चिह्नित किया जा चुका है। इसके अलावा 600 गांवों में सर्वे का काम वर्तमान में लगातार जारी है। आने वाले समय में इन गांवों का डेटा सामने आने के बाद पात्र संपत्तियों की कुल संख्या 55 लाख से बढ़कर 60 लाख के बीच तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
एसएमएस से मिलेगी शुल्क की जानकारी
ग्रामीणों की संपत्तियों की रजिस्ट्री भले ही पूरी तरह मुफ्त करवाई जा रही है, लेकिन सरकार प्रत्येक लाभार्थी को एसएमएस भेजकर शुल्क का विवरण प्रदान कर रही है। इस संदेश के जरिये नागरिक को यह स्पष्ट रूप से पता चल जाता है कि यदि वह स्वयं रजिस्ट्री करवाता तो उसे कितनी राशि खर्च करनी पड़ती। वर्तमान में राजस्व विभाग के बजट में केवल 3,800 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है, जबकि कुल 87,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों के हिसाब से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क की देनदारी लगभग 9,000 करोड़ रुपये बन रही है। सरकार आगामी बजट में अतिरिक्त फंड का प्रावधान करके वाणिज्यिक कर विभाग को इस बकाया राशि का भुगतान करेगी।


