ममता बनर्जी का केंद्र पर निशाना, कहा- मणिपुर में हिंसा के दौरान मारे गए लोगों का स्पष्ट आंकड़ा नहीं दे रही सरकार

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

कोलकाता 09 मई 2023। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंसा प्रभावित मणिपुर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा के दौरान मारे गए लोगों का स्पष्ट आंकड़ा नहीं दे रही है, जहां देखते ही गोली मारने का आदेश लागू है। बनर्जी ने स्थिति की समीक्षा के लिए मणिपुर में एक भी प्रतिनिधि नहीं भेजने के लिए भी केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि न तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और न ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बारे में कुछ कहा कि भाजपा शासित राज्य में आखिर हो क्या रहा है। बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं मणिपुर की स्थिति से बहुत चिंतित हूं। देखते ही गोली मारने (के आदेश) से हुई मौतों का हमें स्पष्ट पता नहीं चल रहा है क्योंकि राज्य सरकार कोई सूचना नहीं दे रही है।” हालांकि, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बाद में कहा कि राज्य में हुए जातीय संघर्ष में करीब 60 लोगों की जान गई है।

बनर्जी ने दावा किया कि मणिपुर हिंसा मानव निर्मित संकट है। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि शाह कर्नाटक विधानसभा चुनाव में इतने व्यस्त हैं कि मणिपुर जाने के लिए उन्हें एक दिन का भी समय नहीं मिल सका जबकि उनके पास रक्षा बलों के हेलीकॉप्टर और विमान हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मणिपुर जल रहा है। लेकिन कोई इस बारे में बात नहीं कर रहा है। चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन लोगों की जान बचाना प्राथमिक कार्य है।

भाजपा मणिपुर में उतनी व्यस्त नहीं है, जितनी चुनावों में है। वह (शाह) मणिपुर जा सकते थे। वह बाद में बंगाल आ सकते थे।” केंद्रीय गृह मंत्री शाह मंगलवार को एक दिन की पश्चिम बंगाल यात्रा पर आएंगे। इस दौरान वह रवींद्रनाथ टैगोर जयंती समारोह में हिस्सा लेंगे और कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे।

मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में तीन मई को 10 पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद पूर्वोत्तर राज्य में हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई। मणिपुर की आबादी में मेइती समुदाय लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी – नागा और कुकी – आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

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