
इंडिया रिपोर्टर लाइव
लंदन 07 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में ईरान के ड्रोन खतरे को देखते हुए अमेरिका अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने जा रहा है। इसके लिए अमेरिका जल्द ही मेरोप्स नामक एंटी-ड्रोन सिस्टम क्षेत्र में तैनात करेगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह वही सिस्टम है जिसने यूक्रेन में रूसी ड्रोन के खिलाफ प्रभावी प्रदर्शन किया है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में अभी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए पर्याप्त तकनीक मौजूद नहीं है। हालांकि अमेरिका ने ईरानी मिसाइलों को गिराने के लिए पैट्रियट (Patriot) और थाड (THAAD) जैसे मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया है, लेकिन छोटे और सस्ते ड्रोन को रोकना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ईरानी ड्रोन बन रहे बड़ी समस्या
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे शाहेद ड्रोन तकनीकी रूप से बहुत जटिल नहीं हैं, लेकिन बड़ी संख्या में छोड़े जाने के कारण ये खतरनाक साबित होते हैं। रूस भी यूक्रेन युद्ध में इसी प्रकार के ड्रोन का लगातार इस्तेमाल कर रहा है और उन्हें लगातार अपग्रेड कर रहा है। यही कारण है कि अमेरिका अब सस्ते और तेज समाधान तलाश रहा है।
महंगे मिसाइल बनाम सस्ते ड्रोन की चुनौती
अमेरिकी कांग्रेस की इंटेलिजेंस कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सदस्य जिम हाइम्स के मुताबिक अमेरिका मिसाइल हमलों को रोकने में तो काफी सक्षम है, लेकिन ड्रोन से निपटना कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक ईरानी ड्रोन की कीमत आमतौर पर 50 हजार डॉलर से भी कम होती है, जबकि उसे मार गिराने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर तक पहुंच जाती है।
ऐसे में सस्ते ड्रोन के खिलाफ लगातार महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग करना व्यावहारिक नहीं है। हाइम्स ने इसे गणित की समस्या बताते हुए कहा कि लागत और संसाधनों के इस असंतुलन के कारण नई और सस्ती एंटी-ड्रोन तकनीक विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है।
कैसे काम करता है मेरोप्स सिस्टम
मेरोप्स एक खास एंटी-ड्रोन तकनीक है जो ड्रोन से ही दुश्मन ड्रोन का पीछा कर उन्हें नष्ट करती है।


