‘यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन-मिसाइलों से किया हमला’, पेंटागन ने की पुष्टि

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वॉशिंगटन 13 नवंबर 2024। यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को दो अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। ये हमले बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास हुए। हालांकि अमेरिकी युद्धपोतों ने इन  हमलों को विफल कर दिया। अमेरिका के रक्षा विभाग ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रवक्ता मेजर जनरल पैट राइडर ने बताया कि हमलावरों ने कम से कम आठ ड्रोन, पांच एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल और तीन एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। हालांकि, इन हमलों में अमेरिकी जहाजों को कोई नुकसान नहीं हुआ और कोई सैनिक घायल नहीं हुआ। राइडर ने यह भी स्पष्ट किया कि हूती विद्रोहियों ने जो विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हमला करने का दावा किया था, वह सही नहीं था। यूएसएस अब्राहम लिंकन को निशाना नहीं बनाया गया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले दुर्लभ होते हैं और इस बार भी अमेरिकी युद्धपोतों ने इन हमलों का सफलतापूर्व मुकाबला किया। 

गाजा युद्ध शुरू होने के बाद हूती विद्रोहियों ने तेज किए हमले
वहीं, हूती समूह ने इन हमलों को लेकर कहा कि उन्होंने गाजा में इस्राइल के खिलाफ चल रहे संघर्ष में फलस्तीनियों का समर्थन करने के लिए ये हमले किए हैं। इस्राइल और हमास के बीत पिछले साल अक्तूबर से युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित समूहों ने लेबनान, इराक, सीरिया और यमन में हमले तेज किए हैं। इन हमलों के दौरान अमेरिकी युद्धपोतों को भी निशाना बनाया गया है। हालांकि अमेरिका अब तक इन हमलों को विफल करने में सक्षम रहा है। 

अमेरिकी ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों को बनाया निशाना
हूती विद्रोहियों के हमलों के जवाब में अमेरिकी ने उनके हथियारों के भंडारण स्थलों को निशाना बनाया। पेंटागन ने कहा कि इन भंडारण स्थलों में उन्नत हथियार रखे हुए थे, जो अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय सैन्य तथा नागरिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे। यह हमले अमेरिकी वायु सेना और नौसेना दोनों के सहयोग से किए गए। 

अपनी सुरक्षा को बढ़ाने के लिए अमेरिका ने क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी को मजबूत किया। इसके अलावा, हूती विद्रोहियों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए अमेरिका ने कई बार उनके खिलाफ हवाई हमले किए हैं। अमेरिका और अन्य देशों ने इस क्षेत्र में सैन्य पोतों को तैनात किया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा बनी रहे और व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखा जा सके। 

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