पुतिन के भारत दौरे पर हाई-टेक किला बन गया था ITC मौर्या, NSG और एंटी-ड्रोन गन थे तैनात

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नई दिल्ली 07 दिसंबर 2025। जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली आए थे, तब 5-स्टार होटल ITC मौर्या को पूरी तरह लॉकडाउन में बदलकर एक हाई-टेक सुरक्षा किले में तब्दील किया गया था। 437 कमरों वाला पूरा होटल केवल रूसी डेलीगेशन और भारतीय सुरक्षा टीमों के लिए आरक्षित किया गया था। होटल के कॉरिडोर में बैरिकेड लगाए गए थे और सभी एंट्री पॉइंट पूरी तरह सील कर दिए गए थे। यह सुरक्षा अभियान भारत की एलीट NSG ब्लैक कैट कमांडो और SWAT टीमों की संयुक्त तैनाती के साथ संचालित किया गया था, जो रूस की शक्तिशाली प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस (SBP) के साथ समन्वय में काम कर रही थी। सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देने वाली और अदृश्य—दोनों प्रकार की थी, जिसमें AI-संचालित निगरानी सिस्टम, प्रशिक्षित स्नाइपर्स और सबसे महत्वपूर्ण, होटल की छतों पर किसी भी आधुनिक हवाई खतरे को निष्क्रिय करने के लिए विशेष एंटी-ड्रोन गन शामिल थीं।

चाणक्य सुइट: 10 लाख प्रतिरात्रि वाला हाई-सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल ज़ोन
इस सुरक्षा किले का केंद्र चाणक्य सुइट था 4,600 वर्ग फुट का भव्य प्रेसिडेंशियल निवास, जिसका किराया प्रति रात ₹8–10 लाख था। यह सुइट एक कमरे से अधिक एक कस्टम-बिल्ट सुरक्षित क्षेत्र जैसा था। इसे 16 सामान्य कमरों को जोड़कर तैयार किया गया था। इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में निजी हाई-स्पीड एलिवेटर और एक खास प्रेसिडेंशियल बुलेवार्ड शामिल था, जिसके माध्यम से सुरक्षित और गुप्त रूप से आगमन सुनिश्चित किया गया था।

हर स्तर पर सुरक्षा
सुरक्षा का स्तर इतना सूक्ष्म था कि पुतिन की टीम होटल के शक्तिशाली एयर प्यूरिफिकेशन सिस्टम की भी बारीकी से जांच करती थी। दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता को संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में माना गया और एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम की क्षमता, एयरफ्लो और संभावित बायोलॉजिकल रिस्क की विस्तृत जांच की गई थी।

सबसे गुप्त प्रोटोकॉल: पुतिन के बायोलॉजिकल सैंपल की विदेशी जमीन पर सुरक्षा
सबसे चौंकाने वाली बात वह प्रोटोकॉल था जिसे आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया। इसे “पूप सूटकेस प्रोटोकॉल” के नाम से जाना गया। इसके तहत रूस की FSO टीम पुतिन के विदेश दौरों के दौरान उनके बायोलॉजिकल वेस्ट को इकट्ठा करती थी, उसे विशेष कंटेनरों में सील करती थी और सीधे रूस वापस ले जाती थी।

इसका उद्देश्य किसी भी विदेशी खुफिया एजेंसी को उनके DNA, स्वास्थ्य या किसी भी बायोलॉजिकल संकेत का विश्लेषण करने से रोकना था। यह एक अभूतपूर्व स्तर की गोपनीयता और सुरक्षा रणनीति थी, जिसने एक साधारण राजनयिक दौरे को पूरी तरह जानकारी-नियंत्रित, हाइपर-सिक्योर ऑपरेशन में बदल दिया।

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