सिंचाई क्षमता बढ़ाने का दावा झूठा, भाजपा की सरकार किसानों के खेत तक पानी पहुंचने में नाकाम

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किसानों का हक़ छीनकर निजी उद्योगपतियों को समर्पित कर रही है सरकार

इंडिया रिपोर्टर लाइव

रायपुर 11 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के सरकार के दावे को झूठा और तथ्यहीन करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भारतीय जनता पार्टी का झूठा प्रमाणित हुआ है। वर्ष 2023-24 में छत्तीसगढ़ में सिंचित क्षेत्र का रकबा 37 प्रतिशत था, जो भारतीय जनता पार्टी के कुशासन के एक वर्ष के भीतर ही वर्ष 2024-25 में 3 फीसदी घटकर मात्र 34 प्रतिशत रह गया है। भाजपा सरकार का फोकस चंद पूंजीपति मित्रों का ही विकास है और उनके औद्योगिक हितों के लिए किसानों के हक और अधिकार का पानी खेतों तक पहुंचाने के बजाय निजी उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है और यही कारण है कि भाजपा की सरकार आने के बाद से छत्तीसगढ़ में सिंचित कृषि भूमि का रकबा बढ़ाने के बजाय घट रहा है। जो बांध और एनीकट कांग्रेस सरकार के दौरान बनाए गए उसका पानी प्राथमिकता से निजी उद्योगों में भेजा जा रहा है। बाहरी राज्यों में संचालित निजी कारखानों में भी छत्तीसगढ़ के नदियों का पानी भाजपा की सरकार भेज रही है, बस्तर के शबरी नदी का पानी स्लरी पाइपलाइन से आंध्र प्रदेश के निजी स्टील प्लांट में भेज रहे हैं, छोटे-छोटे नाले तक इस सरकार की दुर्भावना से बर्बाद हो गए, प्रदेश के किसान बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार किसानों के लिए सिंचाई सुविधा का विस्तार और अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित करने के केवल झूठे वादे करती है, लेकिन इनका असल चरित्र कॉर्पोरेट परस्ती ही है। 15 साल रमन सिंह की सरकार थी एक भी बड़ी सिंचाई परियोजना किसानों के हित में नहीं बनाई गई, अब एक बार फिर शोषण का वही दौर शुरू हो गया है, रायगढ़ में केलो परियोजना के डुबान की भूमि तक नियम विरुद्ध अपने चहेते निजी पूंजीपति को दे दिया, भाजपा के सवा दो साल के सरकार में सिंचित क्षेत्र का रकबा बढ़ाने के बजाय कम हो रहा है, जमीनी हकीकत भाजपा की सरकार के दावे के विपरीत है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार आदतन किसान विरोधी रही है। खाद सब्सिडी में कटौती की गई, खाद का कृत्रिम संकट उत्पन्न किया गया, धान खरीदी में तरह-तरह के व्यवधान डाले गए, 76 हजार कृषि मजदूरों को कृषि मजदूर कल्याण योजना की राशि से वंचित किया गया और अब सिंचाई क्षमता बढ़ाने का जुमला परोसा जा रहा है।

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