रूस में फंसे 26 भारतीयों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब, एक सप्ताह का दिया समय

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नई दिल्ली 11 अप्रैल 2026। रूस-युक्रेन युद्ध में जबरन झोंकने के आरोप को लेकर रूस में फंसे 26 भारतीय नागरिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत दायर की गई है। इसमें इन लोगों की सुरक्षित वापसी की मांग की गई है। याचिका का संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को इस संबंध में एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। 

पासपोर्ट छीनकर रूस-यूक्रेन जंग में फंसाया
याचिकाकर्ताओं के वकील ने पीठ को बताया कि ये 26 भारतीय नौकरी के झांसे में आकर रूस गए थे लेकिन वहां उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और उन्हें जबरन रूस-यूक्रेन जंग में हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई कि वह रूस स्थित भारतीय दूतावास के जरिये तत्काल राजनयिक और कॉन्सुलर उपाय करे, ताकि हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिकों के ठिकाने, कानूनी स्थिति और उनकी सुरक्षा का पता लगाया जा सके। इसने वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस, 1963 और लागू द्विपक्षीय कॉन्सुलर समझौतों के अनुसार, इन व्यक्तियों तक राजनयिक पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश भी मांगे हैं।

भारतीयों की सुरक्षा और सुरक्षित स्वदेश वापसी की मांग
याचिका में कहा गया है कि केंद्र को भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी को सुगम बनाने के लिए सभी आवश्यक राजनयिक कदम उठाने चाहिए। इसमें हिरासत में लिए गए लोगों और उनके परिवारों के बीच बातचीत को आसान बनाने के लिए निर्देश मांगे गए हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि हिरासत में लिए गए लोगों को जरूरत अनुसार उचित चिकित्सा देखभाल, मानवीय व्यवहार और कानूनी सहायता मिले। 

उठाए गए कदमों पर सरकार दे हलफनामा
याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह एक हलफनामा पेश करे, जिसमें उन मामलों में सरकार की ओर से अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल, प्रक्रिया और मानक संचालन तंत्र का विवरण दिया गया हो, जिनमें भारतीय नागरिकों के विदेश में लापता होने, हिरासत में लिए जाने या फंस जाने की खबरें आती हैं। इसमें सरकार को यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि वह अदालत को हिरासत में लिए गए इन नागरिकों के संबंध में अधिकारियों की ओर से पहले ही उठाए गए कदमों से अवगत कराए।

अवैध भर्ती एजेंटों के खिलाफ जांच का निर्देश दिया जाए
याचिका में राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्यों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में सक्रिय उन अवैध भर्ती एजेंटों के खिलाफ जांच और प्रवर्तन तंत्र को शुरू करें और मजबूत करें, जो भारतीय नागरिकों को झूठे बहाने बनाकर विदेश जाने के लिए उकसाते हैं। इसमें आग्रह किया गया कि इन राज्यों को निर्देश दिया जाए कि वे उन लोगों की पहचान करें और उन पर मुकदमा चलाएं जो भारतीय नागरिकों की अवैध विदेशी भर्ती, तस्करी और शोषण में शामिल हैं।

केंद्र ने मांगी मोहलत
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से समय मांगा और कहा कि सरकार इस मामले को देख रही है। इस पर पीठ ने मेहता को इस मामले में निर्देश लेने के लिए समय दिया और याचिका को इस महीने के अंत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

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