ISRO का बड़ा फैसला: अब आम भारतीय भी बन सकेंगे अंतरिक्ष यात्री, गगनयान मिशन के बाद मिलेगा स्पेस जाने का मौका

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 28 अप्रैल 2026। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो अब पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट दल में आम नागरिकों को शामिल करने जा रहा है। यह बड़ा फैसला भारत के मानव अंतरिक्ष मिशनों के भविष्य को देखते हुए लिया गया है। अब तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के चयन में मुख्य रूप से वायुसेना के टेस्ट पायलटों को प्राथमिकता दी जाती रही है, लेकिन अब वैज्ञानिक और तकनीकी पृष्ठभूमि वाले नागरिकों को भी मौका मिलेगा। यह बदलाव गगनयान मिशन और उससे आगे के मिशनों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

क्या है गगनयान मिशन?

गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊंचाई की कक्षा में भेजा जाएगा। यह मिशन तीन दिन तक चलेगा, जिसके बाद क्रू को सुरक्षित भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारा जाएगा। यह मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगा जिन्होंने अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा है।

हेलिकॉप्टर पायलट भी हो सकते हैं शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे बैच में फाइटर पायलटों के अलावा भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलटों को भी मौका मिल सकता है।

नागरिक कब जाएंगे अंतरिक्ष?

हालांकि दूसरे बैच में नागरिकों का चयन होगा, लेकिन उन्हें चौथे गगनयान मिशन से अंतरिक्ष उड़ानों में शामिल किया जा सकता है। यानी शुरुआती मिशनों में अनुभवी सैन्य पायलटों को ही प्राथमिकता मिलेगी।

भारत के स्पेस स्टेशन की तैयारी

यह कदम केवल गगनयान तक सीमित नहीं है। इसरो भविष्य में नियमित मानव मिशन, अंतरिक्ष में वैज्ञानिक रिसर्च और भारत के प्रस्तावित स्पेस स्टेशन की तैयारी कर रहा है। इसी कारण लंबे समय के लिए स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर बनाने की योजना बनाई जा रही है।

तीसरे बैच में और बढ़ेगी नागरिकों की संख्या

समिति के अनुमान के अनुसार:

  • तीसरे बैच में 12 अंतरिक्ष यात्री होंगे।
  • इनमें दो मिशन पायलट होंगे।
  • 10 नागरिक विशेषज्ञ होंगे।

कुल मिलाकर भविष्य में 40 एस्ट्रोनॉट्स का कैडर बनाने की योजना है।

ट्रेनिंग में लगेंगे 4.5 साल

एक अंतरिक्ष यात्री के चयन, प्रशिक्षण और मिशन तैयारी की पूरी प्रक्रिया लगभग 4.5 साल की बताई गई है। फिलहाल इसरो के पास अस्थायी प्रशिक्षण केंद्र है और जल्द ही पूर्ण विकसित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जा सकता है।

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