गडकरी ने पेश किया पानी और इथेनॉल से चलने वाला स्वदेशी चूल्हा; बोले- LPG से भी सस्ता

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इंडिया रिपोर्टर लाइव

नई दिल्ली 26 मई 2026। देश के कुछ हिस्सों में रसोई गैस (LPG) की किल्लत की खबरों और होर्मुज मार्ग बाधित होने से बढ़ती आयात संबंधी परेशानियों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक क्रांतिकारी समाधान पेश किया है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने एक नई इथेनॉल आधारित स्टोव तकनीक (Ethanol-Based Stove Technology) का अनावरण किया। उन्होंने दावा किया कि इस स्वदेशी तकनीक वाले स्टोव में खाना पकाना कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की तुलना में काफी सस्ता पड़ेगा और यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल भी है।

पानी और इथेनॉल के मेल से पैदा होगी ‘स्वच्छ लौ’
इस नई टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह स्टोव सीधे इथेनॉल से नहीं, बल्कि इथेनॉल में पानी मिलाकर (Ethanol mixed with water) काम करता है। इन दोनों के मिश्रण से एक स्वच्छ कुकिंग फ्लेम पैदा होती है जो पारंपरिक केरोसिन और गैस सिलेंडरों के मुकाबले सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त विकल्प प्रदान करती है। भारत के बढ़ते बायोफ्यूल मिशन में इसे एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।

वाहनों के बाद अब रसोई में भी इथेनॉल का जलवा
पिछले एक दशक में भारत ने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में शानदार प्रगति की है। साल 2014 में पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण मात्र 1.5% था, जो सरकारी नीतियों और निवेश के कारण साल 2025 तक लगभग 20% तक पहुंच गया है। अब तक सरकार का ध्यान वाहनों पर था लेकिन अब इसे कुकिंग फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है।

आम आदमी को बचत, किसानों को मुनाफा

  • सस्ता विकल्प: गडकरी के अनुसार यह तकनीक कमर्शियल LPG की तुलना में काफी सस्ती पड़ेगी, जिससे आम परिवारों और होटल व्यवसायों का मासिक खर्च कम होगा।
  • आयात बिल में कटौती: भारत अपनी ईंधन जरूरतों का 85% हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जाते हैं; इथेनॉल का बढ़ता उपयोग इस आर्थिक बोझ को कम करेगा।
  • अन्नदाता की बढ़ेगी आय: चूंकि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्के से बनता है, इसकी मांग बढ़ने से किसानों की आय में भारी इजाफा होगा।

सेहत के लिए वरदान, सुरक्षा के लिए चुनौती
लकड़ी, कोयले या केरोसिन के विपरीत इथेनॉल पूरी तरह स्वच्छ जलता है जिससे घर के भीतर हानिकारक कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन न के बराबर होता है और हवा शुद्ध रहती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसे घर-घर तक पहुंचाने के लिए सरकार को सख्त सुरक्षा मानक तय करने होंगे, क्योंकि इथेनॉल एक अत्यधिक ज्वलनशील तरल ईंधन है।

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