सांसद-विधायक निधि का भी इस्तेमाल

इंडिया रिपोर्टर लाइव
रामपुर, 21 अगस्त 2026। रामपुर में पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों के नियंत्रण वाले जौहर ट्रस्ट द्वारा बनवाए गए जौहर विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर काले धन को खपाया गया था। जौहर यूनिवर्सिटी, ट्रस्ट के पदाधिकारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनियों के ठिकानों पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापों में इसका सुराग मिला है। यूनिवर्सिटी समेत सभी ठिकानों से मिले दस्तावेजों से सरकारी विभागों के धन, सांसद-विधायक निधि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के प्रमाण भी मिले हैं जिसके बाद आजम खां, संबंधित विभागों के तत्कालीन अधिकारी, ठेकेदार आदि ईडी के रडार पर आ चुके हैं। सूत्रों की मानें तो जौहर यूनिवर्सिटी में सांसद-विधायक निधि के काम कराने वाले छह ठेकेदार निशाने पर हैं।
इन सभी को पूछताछ के लिए नोटिस देकर तलब किया जाएगा। इनमें जल निगम, पीडब्ल्यूडी, ग्राम्य विकास विभाग, संस्कृति विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर विकास और सिंचाई विभाग शामिल हैं। यह भी पता चला है कि सरकारी धन का इस्तेमाल जिले के विकास कार्यों के लिए होना था जबकि उसे बैंक से नकद निकाल कर जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण कार्यों में खर्च किया गया। इसके लिए रामपुर के कई निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों को अलग-अलग सरकारी ठेके दिलाए गए, हालांकि वह ट्रस्ट की संपत्तियां बनवाते रहे। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स ने सरकारी अनुबंध से मिली करीब 86 करोड़ रुपये की सरकारी रकम का गलत इस्तेमाल किया। इसका कोई हिसाब-किताब भी नहीं रखा।
खुलासे के बाद भी कार्रवाई नहीं
हैरानी की बात है कि जौहर यूनिवर्सिटी की जांच करीब पांच वर्ष से जारी होने के बावजूद संबंधित विभागों के तत्कालीन अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आजम के करीबी नगर विकास विभाग के एक अफसर भी जांच के दायरे में आए थे हालांकि सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसी तरह लखनऊ की एक आर्किटेक्ट फर्म भी जांच के दायरे में आ चुकी है जिसे करोड़ों रुपये का भुगतान हुआ था।
दानदाताओं पर भी ईडी का शिकंजा 11 फर्मों का रिकार्ड साथ ले गई टीम
जौहर यूनिवर्सिटी में करीब 16 घंटे तक चली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद बुधवार की रात टीम वापस लौट गई। इस दौरान ईडी ने यूनिवर्सिटी के निर्माण, जमीन खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर और जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे से जुड़े दस्तावेज खंगाले। इसके अलावा 11 फर्मों के दस्तावेज भी ईडी अपने साथ ले गई। अब ईडी की नजर दानदाताओं पर टिकी है। कुल मिलाकर इस मामले में सपा नेता आजम खां के साथ ही दानदाताओं की भी मुश्किलें बढ़नी तय हैं। ईडी ने बुधवार को जौहर विश्वविद्यालय और जौहर ट्रस्ट के कार्यालय समेत छह स्थानों पर कार्रवाई की थी। इसके अलावा सहारनपुर, दिल्ली में भी आजम खां के करीबी के यहां छापे मारे गए। जांच में विश्वविद्यालय निर्माण पर अनुमानित 494 करोड़ रुपये खर्च होने से संबंधित हिसाब-किताब ईडी के केंद्र में रहा। ट्रस्ट की ओर से निर्माण में खर्च हुई धनराशि, विश्वविद्यालय के लिए खरीदी गई जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए खर्च से जुड़े सभी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
इसके अलावा सरकारी बजट से मिले करीब 88 करोड़ रुपये और दान के रूप में प्राप्त धनराशि के इस्तेमाल से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर भी ईडी ने जानकारी जुटाई। जांच में जौहर ट्रस्ट ने जिन लोगों से दान मिलने का दावा किया था, उनसे भी पूछताछ की जाएगी।


