कटनी कलेक्टर न्यायालय ने लगाया 27.44 करोड़ का जुर्माना

इंडिया रिपोर्टर लाइव
कटनी, 06 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में रेत के स्टॉक में भारी गड़बड़ी के मामले में कलेक्टर न्यायालय ने बड़ा एक्शन लिया है। सैंड पोर्टल पर दर्ज रेत के स्टॉक और मौके पर मिली रेत में 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर का अंतर पाए जाने पर मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड पर 27 करोड़ 44 लाख 29 हजार 650 रुपये की शास्ति अधिरोपित की गई है। कलेक्टर न्यायालय ने फर्म को निर्धारित राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
मामले में करीब तीन साल तक चली कार्रवाई और सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से अभियोजन पक्ष और कंपनी के अधिवक्ता ने अपने-अपने दस्तावेज और तर्क प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
पोर्टल पर 1.46 लाख घनमीटर, मौके पर मिली सिर्फ 100 घनमीटर रेत
जिले के स्वीकृत रेत भंडारण स्थलों में दर्ज स्टॉक के भौतिक सत्यापन के दौरान विजयराघवगढ़ तहसील के ग्राम पुरैनी स्थित मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के स्टॉक की जांच की गई। जांच में सामने आया कि सैंड पोर्टल पर 1 लाख 46 हजार 462 घनमीटर रेत का स्टॉक दर्ज था, जबकि मौके पर करीब 100 घनमीटर रेत ही मिली। इस तरह पोर्टल और वास्तविक स्टॉक में 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर का अंतर सामने आया।
30 सितंबर को आदेश, 1 अक्टूबर को पहुंची जांच टीम
कटनी के माइनिंग अधिकारी रत्नेश दीक्षित के मुताबिक, पूरे प्रकरण की जांच के आदेश 30 सितंबर 2023 को तत्कालीन खनिज अधिकारी को प्राप्त हुए थे। इसके बाद कलेक्टर के निर्देशन में 1 अक्टूबर 2023 को खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ग्राम पुरैनी स्थित रेत भंडारण स्थल पर पहुंची।
टीम ने मौके की वस्तुस्थिति की जांच की, स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया और पंचनामा तैयार किया। इसके बाद जांच रिपोर्ट कलेक्टर न्यायालय के समक्ष पेश की गई। पोर्टल पर दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध रेत में भारी अंतर मिलने के बाद फर्म से रेत के वैध विक्रय और विधिसम्मत परिवहन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए। हालांकि, फर्म इतनी बड़ी मात्रा में रेत भंडारण स्थल से बाहर जाने को वैध साबित करने वाले संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी।
लंबे समय तक चली सुनवाई
मामले में कलेक्टर न्यायालय के समक्ष लंबे समय तक सुनवाई चली। जिला प्रशासन की ओर से अभियोजन पक्ष ने जांच रिपोर्ट, पंचनामा, विभागीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए, जबकि कंपनी के अधिवक्ता ने अपने पक्ष में दस्तावेज और तर्क रखे। कंपनी की ओर से जांच में तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों का भी हवाला दिया गया।
कलेक्टर न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों के साथ विभागीय प्रतिवेदन, स्थल निरीक्षण पंचनामा, साक्षियों के कथन और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि कंपनी की ओर से पेश किए गए तर्क 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर के स्टॉक अंतर का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देते।
वैध परिवहन के दस्तावेज नहीं कर सकी पेश
न्यायालय ने माना कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में रेत का वैध विक्रय या परिवहन किया गया था, तो उसके समर्थन में अभिवहन पास, परिवहन दस्तावेज और अन्य वैधानिक अभिलेख प्रस्तुत किए जाने चाहिए थे। फर्म इनका संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रही।
संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए न्यायालय ने यह भी माना कि पोर्टल पर स्टॉक दर्ज होने के बावजूद स्वीकृत भंडारण स्थल पर रेत उपलब्ध नहीं होना या दर्ज मात्रा से कम मिलना, बिना अभिवहन पास के रेत के प्रेषण की संभावना को दर्शाता है।
1.46 लाख घनमीटर का अंतर स्थापित, 27.44 करोड़ की शास्ति
सभी साक्ष्यों और दलीलों के परीक्षण के बाद कलेक्टर न्यायालय ने 1 लाख 46 हजार 362 घनमीटर रेत का अंतर स्थापित माना और मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम, 2022 के नियम-19 के तहत शास्ति अधिरोपित की।
आदेश के मुताबिक, उक्त मात्रा की रेत पर निर्धारित रॉयल्टी 1 करोड़ 83 लाख 95 हजार 310 रुपये है। नियम के तहत रॉयल्टी की 15 गुना राशि यानी 27 करोड़ 44 लाख 29 हजार 650 रुपये की शास्ति मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड पर लगाई गई है। कलेक्टर न्यायालय ने फर्म को निर्धारित राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
माइनिंग अधिकारी ने क्या बताया?
कटनी के माइनिंग अधिकारी रत्नेश दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2023 में मिले निर्देश के बाद खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। पंचनामा तैयार कर जांच रिपोर्ट कलेक्टर न्यायालय में पेश की गई। इसके बाद प्रशासन के अभियोजन पक्ष और कंपनी के अधिवक्ता ने लंबे समय तक अपने-अपने दस्तावेज और तर्क प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने फर्म पर 27.44 करोड़ रुपये की शास्ति अधिरोपित की है।


