यूएनजीए में भारत समेत 152 देशों का मिला समर्थन

इंडिया रिपोर्टर लाइव
संयुक्त राष्ट्र, 18 सितंबर 2026। भारत ने महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। इसमें फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अगले हफ्ते होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में वीडियो लिंक के जरिये भाषण देने की अनुमति दी गई है। अमेरिका ने अब्बास को न्यूयॉर्क आने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया था।
यह प्रस्ताव बुधवार को भारी बहुमत से पारित हुआ। इसके पक्ष में 152 वोट पड़े। सिर्फ अमेरिका, इस्रइल और पराग्वे ने इसके खिलाफ वोट किया। चार देशों ने औपचारिक रूप से मतदान से दूरी बनाई।
ईरानी राष्ट्रपति को अमेरिका ने वीजा दिया?
हालांकि, वाशिंगटन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए वीजा दिया है। यह तब हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब सातवें महीने में पहुंच चुका है। यह दूसरी बार होगा, जब अब्बास महासभा में वीडियो लिंक के जरिये भाषण देंगे। पिछले साल भी वीजा नहीं मिलने के बाद उन्होंने वीडियो लिंक के जरिये भाषण दिया था।
फलस्तीन पर क्या तर्क दिया?
अमेरिका की उप स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने अब्बास को वीडियो के जरिये भाषण देने की अनुमति देने से इनकार करने का बचाव किया। उन्होंने फलस्तीन पर आतंकवाद गतिविधियों को छोड़ने से इनकार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, हम इस बात पर जोर देना बंद नहीं करेंगे कि फलस्तीनी प्राधिकरण और पीएलओ (फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन जो प्राधिकरण को नियंत्रित करता है) पूरी तरह और बिना किसी शर्त के आतंकवाद को छोड़ें। उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।
फलस्तीन के स्थायी पर्यवेक्षक ने क्या कहा?
फलस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में उसे पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है। फलस्तीन के स्थायी पर्यवेक्षक रियाद मंसूर ने इस्राइल के साथ फलस्तीन के अस्तित्व के अधिकार को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों को ‘शांति और सुरक्षा में’ साथ रहना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें वीजा देने से इनकार किए जाने का मतलब यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र में मौजूद सबसे बड़ा मुद्दा (फलस्तीनी लोग और उनका नेतृत्व) यहां मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा, वे यहां पूरी तरह मौजूद हैं।

