रिश्तों को बताया बेहतरीन, जयशंकर से मुलाकात का भी किया जिक्र

इंडिया रिपोर्टर लाइव
वॉशिंगटन, 25 सितंबर 2026। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में कभी-कभी उतार-चढ़ाव आता रहा है, लेकिन अभी नेपाल और भारत के बीच रिश्ते अच्छे दौर में हैं। उन्होंने कहा कि काठमांडो भारत के साथ संबंधों में मतभेदों के बजाय अवसरों पर ध्यान देते हुए व्यावहारिक तरीका अपना रहा है।
भारत के साथ रिश्तों पर नेपाल के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल और भारत के संबंध बहुत मजबूत और कई स्तरों वाले हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल के कुल व्यापार का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारत के साथ होता है। दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। खनाल ने कहा कि राजनीतिक स्तर पर कभी-कभी रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, लेकिन मौजूदा समय में दोनों देशों के संबंधों को वह बेहतरीन मानते हैं। उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल की नई सरकार के बीच संबंधों से जुड़े सवाल के जवाब में कही।
जयशंकर से मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई बात?
खनाल ने बताया कि उन्होंने न्यूयॉर्क में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की है। दोनों नेताओं के बीच भारत-नेपाल संबंधों और आपसी हित के मुद्दों पर बातचीत हुई। इसमें विकास साझेदारी और ऊर्जा सहयोग की प्रगति पर चर्चा हुई। नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। यह बातचीत संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर हुई।
भारत और चीन के बीच नेपाल किस नीति पर चल रहा?
भारत और चीन के बीच संतुलन को लेकर पूछे गए सवाल पर खनाल ने कहा कि नेपाल अब रिश्तों को केवल वैचारिक नजरिए से देखने के बजाय व्यावहारिक सहयोग पर ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ सीमा जैसे विवादित मुद्दे हो सकते हैं, लेकिन नेपाल का मौजूदा तरीका यह देखने का है कि सहयोग के कौन-कौन से अवसर मौजूद हैं। भारत के साथ ऊर्जा व्यापार को उन्होंने इसी व्यावहारिक नीति का उदाहरण बताया। खनाल ने कहा कि नेपाल की अर्थव्यवस्था आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए ऊर्जा और व्यापार में सहयोग उसके लिए महत्वपूर्ण है।
भारत के साथ नेपाल के लिए ऊर्जा और बाजार क्यों अहम?
खनाल ने कहा कि नेपाल की भौगोलिक स्थिति उसके लिए बड़ी आर्थिक संभावना बन सकती है। उन्होंने भारत के साथ 1,700 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा का जिक्र किया। यह सीमा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से जुड़ती है। उन्होंने बताया कि नेपाल के पास आर्थिक रूप से उपयोगी करीब 43 गीगावाट जलविद्युत क्षमता है और देश 2035 तक 28,000 मेगावाट तक पहुंचने की दिशा में काम करना चाहता है। इससे भारत और आगे बांग्लादेश को स्वच्छ बिजली निर्यात करने की संभावना है।
नेपाल भारत और चीन के बीच अपनी जगह को कैसे देख रहा?
खनाल ने कहा कि नेपाल खुद को केवल भारत और चीन के बीच स्थित छोटे देश के रूप में नहीं देखता। उनका कहना है कि दोनों बड़े पड़ोसियों का आकार भौगोलिक सच्चाई है, लेकिन यह नेपाल की महत्वाकांक्षाओं की सीमा नहीं बनना चाहिए। चीन के साथ भी नेपाल का रुख व्यावहारिक और व्यापार आधारित रखने की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि नेपाल उत्तर और दक्षिण के रास्तों को एक-दूसरे का विकल्प नहीं मानता, बल्कि दोनों दिशाओं को जोड़कर देश को लैंडलॉक्ड यानी भू-आबद्ध अर्थव्यवस्था से लैंड-लिंक्ड यानी जमीन के रास्ते से जुड़े आर्थिक केंद्र में बदलना चाहता है।
भारत-नेपाल रिश्तों में आगे किस तरह के सहयोग पर जोर?
खनाल के बयान से साफ है कि नेपाल भारत के साथ रिश्तों को व्यापार, ऊर्जा, संपर्क और विकास के क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेदों पर अधिक ध्यान देने के बजाय व्यावहारिक सहयोग के क्षेत्रों को मजबूत करना जरूरी है। भारत के साथ व्यापार और ऊर्जा सहयोग को नेपाल अपनी आर्थिक जरूरतों से जोड़कर देख रहा है। साथ ही चीन के साथ भी संपर्क और व्यापार बढ़ाने की नीति है। यानी काठमांडो दोनों पड़ोसियों के साथ संबंधों को प्रतिस्पर्धा के बजाय आर्थिक अवसरों के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।


