गाजा में फलस्तीनियों पर टूटा उग्रवादियों और पुलिस का कहर, कुछ को बनाया अपंग तो कई को उतारा मौत के घाट

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रामल्लाह 10 जून 2026। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गाजा में हमास से जुड़े लड़ाकों और पुलिस इकाइयों ने युद्ध के दौरान दर्जनों फलस्तीनियों की हत्या की, उन्हें गंभीर रूप से घायल किया और सार्वजनिक रूप से फांसी दी। रिपोर्ट के अनुसार, ये कृत्य युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की ओर से मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्धग्रस्त गाजा में सैकड़ों मामलों में लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सजा दी गई। इन घटनाओं का प्रचार भी किया गया ताकि आम लोगों में डर का माहौल बनाया जा सके।

फलस्तीनियों पर कैसे बरपाया गया कहर?
रिपोर्ट के मुताबिक, कई मामलों में लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया, घुटनों में गोली मारी गई, लोहे की पाइप और सीमेंट की ईंटों से हड्डियां तोड़ी गईं तथा बुरी तरह पीटा गया। इन कार्रवाइयों को कथित तौर पर इस्राइल के लिए जासूसी करने, राहत सामग्री लूटने, चोरी, नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध या राजनीतिक विरोधियों से संबंध रखने की सजा के रूप में पेश किया गया।

249 मामलों का किया गया दस्तावेजीकरण
यूएन आयोग ने अगस्त 2024 से जनवरी 2026 के बीच ऐसे 249 मामलों का दस्तावेजीकरण किया है, जिनमें 108 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन घटनाओं में से लगभग एक-चौथाई मामलों में हमास से जुड़े लड़ाकों और पुलिस बलों की भूमिका सामने आई है। आयोग ने हमास से जुड़े मामलों की विशेष जांच की, हालांकि अन्य सशस्त्र समूहों पर लगे आरोपों को भी दर्ज किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सजा देने की ये कार्रवाइयां अदालतों या न्यायाधीशों के आदेश से नहीं, बल्कि हमास की सैन्य शाखा और पुलिस इकाइयों द्वारा सीधे की गईं।

हमास ने किन-किन लोगों को बनाया निशाना?

  • रिपोर्ट के अनुसार, निशाने पर आए लोगों में हमास विरोधी कार्यकर्ता, इस्राइल समर्थित स्थानीय समूहों के सदस्य और ऐसे लोग शामिल थे, जिन पर हमास को कमजोर करने का आरोप लगाया गया था।
  • यूएन ने जिन मामलों का जिक्र किया है, उनमें सितंबर 2025 में शिफा अस्पताल के बाहर तीन आंखों पर पट्टी बंधे लोगों को भीड़ के सामने गोली मारने की घटना भी शामिल है।
  • इसके अलावा अक्तूबर 2025 में गाजा सिटी के एक सार्वजनिक चौक पर आठ लोगों को घसीटकर लाया गया और गोली मार दी गई। इन लोगों पर जासूस, गद्दार और इस्राइल का सहयोगी होने का आरोप लगाया गया था।
  • यूएन आयोग ने कहा कि ये घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन हैं।
  • आयोग के अनुसार, ऐसे कृत्य हत्या के युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं और जीवन, स्वतंत्रता, सुरक्षा तथा निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हनन करते हैं।
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई लोगों, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, को चोरी, नशीले पदार्थों की तस्करी या तंबाकू की अवैध बिक्री के आरोप में सार्वजनिक रूप से पीटा गया और अपमानित किया गया।
  • कुछ गवाहों ने बताया कि ऐसी सजा अस्पताल परिसरों में भी दी गई, जिनमें खान यूनिस का नासिर मेडिकल कॉम्प्लेक्स शामिल है।

हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसरों में हुई इन घटनाओं के बावजूद अस्पतालों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मिलने वाला संरक्षण समाप्त नहीं होता। गौरतलब है कि इस्राइल लंबे समय से हमास पर स्कूलों, अस्पतालों और मस्जिदों का सैन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाता रहा है। रिपोर्ट में पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में इस्राइली बसने वालों द्वारा बढ़ती हिंसा की भी आलोचना की गई है। यूएन का कहना है कि यह हिंसा फलस्तीनी क्षेत्रों पर इस्राइली नियंत्रण मजबूत करने, बस्तियों के विस्तार और फलस्तीनियों को उनकी जमीनों से हटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।

इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से 1098 फलस्तीनियों की मौत
यूएन के आंकड़ों के अनुसार, इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इस्राइली सैनिकों या बसने वालों की कार्रवाई में 1,098 फलस्तीनियों की मौत हुई है, जिनमें कम से कम 240 बच्चे शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कई बेडौइन समुदायों को भी अपनी जमीन छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है, जबकि नई इस्राइली चौकियां स्थापित की जा रही हैं और कुछ पुरानी बस्तियों को कानूनी मान्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हमास ने फिलहाल यूएन रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, इस्राइल के विदेश मंत्रालय की ओर से भी रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर कोई जवाब नहीं आया है।

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