‘राष्ट्रपति की बात बेतुकी, आंतरिक मुद्दे पर बोलने का हक नहीं’; जरदारी को भारत की दो-टूक

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नई दिल्ली 21 जून 2026। भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी को शनिवार को सख्ती से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में इसे अनुचित और भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की कोशिश बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बयानों को पूरी तरह खारिज करता है। उन्होंने भारत से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करने के उनके अधिकार पर भी सवाल उठाया। रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, “भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गई अनुचित टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज करता है। किसी भी स्थिति में उन्हें भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।” पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कथित तौर पर मुस्लिम ऐतिहासिक स्थलों को ध्वस्त किए जाने का मुद्दा उठाया था।

वाराणसी की अवैध मस्जिद पर जरदारी को आई मुस्लिम उम्माह की याद
आसिफ अली जरदारी की यह टिप्पणी उस समय सामने आई, जब भारतीय रेलवे ने काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद के परिसर में रह रहे लोगों को 20 जून तक जगह खाली करने का नोटिस जारी किया था।

भारत ने पाकिस्तान को दिखाया आईना 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड की भी आलोचना करते हुए कहा कि अपने ही देश की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति की यह टिप्पणी अनुचित है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड की स्थिति बेहद खराब है और यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय रही है। ऐसे में उनकी टिप्पणियां विशेष रूप से हास्यास्पद हैं। जायसवाल ने आगे कहा कि पाकिस्तान में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न का लंबा इतिहास रहा है और इसको लेकर उसे व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, “विभिन्न आस्थाओं से जुड़े अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उन्हें प्रताड़ित करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है।

जरदारी का बयान सियासत से प्रेरित :विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणी वास्तविक चिंता व्यक्त करने के बजाय राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है। उन्होंने कहा, “इस वास्तविकता को देखते हुए राष्ट्रपति की टिप्पणियों को केवल एक सुनियोजित राजनीतिक हमला माना जा सकता है, जो पाकिस्तान की कट्टरता और नफरत पर आधारित नीतियों से प्रेरित है।”

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